SANGOPANG

यादगार हिंदी फिल्में

Classic Hindi films

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SANGOPANG ज्ञानकोष

हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्में: कहानी, कलाकार, संगीत, गीत और पुरस्कार. चालीस के दशक की क्लासिक फिल्मों से लेकर आज के दौर तक, हर फिल्म पर क्लिक करके पूरी जानकारी देखें.

1942: ए लव स्टोरी1942: A Love Story (1994)
भारत छोडो आंदोलन की पृष्ठभूमि में एक प्रेम कहानी के अनोखे विचार पर आधारित “1942 ए लव स्टोरी” एक बेहद खूबसूरत फिल्म है.
3 इडियट्स3 Idiots (2009)
राजकुमार हीरानी एक ऐसे निर्देशक माने जाते हैं जिनकी फिल्मों में सार्थक मनोरंजन के साथ साथ जीवनोपयोगी सन्देश भी छुपे होते हैं.
अंकुशAnkush (1986)
हिंदी सिनेमा अस्सी के दशक में एक अजीब दौर से गुजर रहा था.
अंदाजAndaz (1949)
हिंदी फिल्मों में दोस्ती और प्रेम के विषय पर “संगम” है “और” कुछ कुछ होता है “जैसी यादगार फिल्में बनी है पर इन सभी फिल्मों को प्रेरणा देने वाली फिल्म थी महबूब खान की फिल्म” अंदाज “.
अक्सAks (2001)
निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा बॉलीवुड के सबसे प्रतिभाशाली निर्देशकों में से एक गिने जाते हैं.
अनमोल घड़ीAnmol Ghadi (1946)
निर्देशक महबूब खान हिंदी फिल्म इतिहास के उन चुनिन्दा नामों में से एक है जिन्हें व्यवसायिक सफलता और आलोचकों की सराहना दोनों एक साथ प्राप्त हुई.
अपहरणApaharan (2005)
प्रकाश झा उन फिल्मकारों में से हैं जो समाज में होने वाली समसामयिक घटनाओं और ज्वलंत मुद्दों को अपनी फिल्मों का विषय बनाते हैं.
अमर अकबर एंथनीAmar Akbar Anthony (1977)
हिंदी मसाला फिल्मों के पितृ पुरुष मनमोहन देसाई की सबसे सफल यह फिल्म हिंदी फिल्मों की आकाशगंगा में ध्रुव तारे के समान चमकती है.
अर्थArth (1982)
हिंदी फिल्म इतिहास की बेहतरीन फिल्मों में से एक “अर्थ” वर्ष 1982 में आई.
अर्ध सत्यArdh Satya (1983)
गोविन्द निहलानी का नाम उन निर्देशकों में लिया जाता है जिन्हें हिंदी सिनेमा में समानांतर सिनेमा की शुरुआत करने का श्रेय जाता है.
आक्रोशAakrosh (1980)
समानांतर सिनेमा के सशक्त हस्ताक्षर गोविन्द निहलानी ने हिंदी फिल्म जगत में कदम रखा वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म “आक्रोश” से.
आजादAzaad (1955)
भारतीय फिल्म इतिहास में अदाकारी के एक अजीम नाम दिलीप कुमार को फिल्म इंडस्ट्री में “ट्रेजडी किंग” के नाम से जाना जाता है.
आनAan (1952)
हिंदी फिल्म इतिहास के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में से एक महबूब खान द्वारा निर्मित और निर्देशित आन (1952) भारत की पहली टेक्नीकलर फिल्म थी.
आनंदAnand (1971)
वर्ष 1971 में प्रदर्शित यह फिल्म एक बेहद संवेदनशील विषय को बहुत ही खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत करती है.
आराधनाAradhana (1969)
पहाड़ों में बलखाती एक रेल की पटरी और उस पर धुआं उड़ाती एक रेलगाड़ी, उस रेलगाड़ी के एक डिब्बे की खिड़की से झांकती एक हसीना और पटरी की साथ दौड़ती सड़क पर एक खुली जीप में माउथआर्गन बजाता एक नौजवान और फिजां में गूंज रहा था “मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू”.भारतीय सिनेमा में इस दृश्य ने एक नए युग की शुरुआत का उद्घोष किया था.
आवाराAwaara (1951)
वर्ष 1951 में प्रदर्शित हुई यह फिल्म भारतीय फिल्म उद्योग में मील का एक पत्थर मानी जाती है.
इकबालIqbal (2005)
एक मूक बधिर नौजवान की क्रिकेटर बनने की ख्वाहिश पर आधारित “इकबाल” एक बेहद हृदयस्पर्शी और खूबसूरत फिल्म है.
इश्कIshq (1997)
इन्द्र कुमार मसाला फिल्मों के माहिर निर्देशक माने जाते हैं.
उपकारUpkar (1967)
मनोज कुमार और देशभक्ति फिल्में एक दूसरे का पर्याय माने जाते हैं.
ए वेडनेसडे!A Wednesday! (2008)
आतंकवाद के विषय पर बनी अब तक की सर्वश्रेष्ठ भारतीय फिल्म “ऐ वेड़नसडे!” ने हिंदी फिल्म उद्योग की सभी प्रचलित धारणाओं को धत्ता बताते हुए बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता को लोहा मनवा दिया.
ओम शांति ओमOm Shanti Om (2007)
पुनर्जन्म हिंदी फिल्मकारों का हमेशा से ही पसंदीदा विषय रहा है.
ओमकाराOmkara (2006)
हिंदी फिल्मोद्योग के सबसे प्रतिभावान और संभावनाशील निर्देशकों में विशाल भारद्वाज का नाम सबसे पहले लिया जाता है.
कंपनीCompany (2002)
वर्ष 2002 में प्रदर्शित हुई निर्देशक रामगोपाल वर्मा की फिल्म “कम्पनी” अपराध सरगना दाउद इब्राहीम और छोटा राजन की गैंगवार पर आधारित थी.
कभी खुशी कभी गमKabhi Khushi Kabhie Gham (2001)
वर्तमान समय में जब नए फिल्मकार हिंदी फिल्मों में उन्मुक्तता और शालीनता की सीमायें लांघ रहे है तो ऐसे में साथ के दशक की फिल्मों की शालीनता और सरसता को परदे पर जिन्दा रखने वाले निर्देशकों में से एक नाम है निर्देशक करण जौहर.
करण अर्जुनKaran Arjun (1995)
निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन अपनी फिल्मों का नाम अंग्रेजी के अक्षर “के” से रखने के लिए जाने जाते हैं, उनका मानना है की यह उनके लिए भाग्यशाली है.
कल हो ना होKal Ho Naa Ho (2003)
सत्तर के दशक की क्लासिक फिल्म “आनंद” से प्रेरित निर्माता यश जौहर और करण जौहर की फिल्म “कल हो ना हो” के जरिये निखिल आडवानी ने हिंदी फिल्म जगत में निर्देशक के रूप में अपना पहला कदम रखा.
कहो ना प्यार हैKaho Naa... Pyaar Hai (2000)
कहो ना प्यार है “रोशन परिवार” हिंदी फिल्म जगत के उन गिने चुने परिवारों में से एक है जिसकी तीन पीढियां फिल्मों से जुडी हुई हैं.
किस्मतKismet (1943)
बोम्बे टॉकीज निर्मित और ज्ञान मुखर्जी लिखित और निर्देशित किस्मत ४० के दशक की सबसे सफल फिल्म साबित हुई.
कुछ कुछ होता हैKuch Kuch Hota Hai (1998)
कॉलेज के रोमांस और दोस्ती और प्यार को केंद्र में रख कर बनी इस फिल्म को नौजवानों ने हाथो हाथ लिया.
कुलीCoolie (1983)
हिंदी फिल्म जगत में यदि फार्मूला फिल्में बनाने की महारत किसी निर्देशक में थी तो वो थे मनमोहन देसाई.
कोई मिल गयाKoi... Mil Gaya (2003)
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे निर्माता निर्देशक हुए है जो किसी खास अक्षर या विशेष शब्द से अपनी फिल्मों का नाम रखते रहे हैं.
क्रांतिKranti (1981)
हिंदी फिल्मों में देशभक्ति और मनोज कुमार एक दूसरे के पर्यायवाची माने जाते हैं.
क्रिशKrrish (2006)
हॉलीवुड में सुपर हीरो आधारित फिल्में बनाने का चलन आम है पर भारतीय फिल्मोद्योग को अपना पहला सुपर हीरो पाने के लिए सन 2006 तक इंतजार करना पड़ा.
खाकीKhakee (2004)
बॉलीवुड की अधिकतर फिल्मों में पुलिस विभाग और पुलिस अधिकारियों का निरूपण वास्तविकता से कोसों दूर और ग्लैमर के आवरण में लिपटा हुआ और होता है.
गंगा जमुनाGunga Jumna (1961)
दो भाई, एक पुलिस अधिकारी, एक अपराधी, एक आदर्शवादी, दूसरा हालातों की वजह से राह से भटका, एक शांत, दूसरा विद्रोही.
गजनीGhajini (2008)
आमिर खान उन अभिनेताओं में से हैं जो हमेशा कुछ नया और मौलिक करके दर्शकों को चमत्कृत कर देते हैं.
गदर: एक प्रेम कथाGadar: Ek Prem Katha (2001)
1947 में देश को आजादी की सौगात के साथ विभाजन की खौफनाक विभीषिका भी लाया.
गाइडGuide (1965)
सन 1965 में प्रदर्शित हुई विजय आनंद निर्देशित तथा देव आनंद निर्मित यह फिल्म आर.
गुलालGulaal (2009)
अनुराग कश्यप उन चुनिन्दा संभावनाशील सृजनकारों में से हैं जिन्होंने अपने अलग अंदाज से थोड़े ही समय में हिंदी फिल्म जगत में अपने लिए एक खास मुकाम हासिल किया है.
गॉडमदरGodmother (1999)
अपराध और माफिया आधारित फिल्में बनाना हिंदी फिल्म निर्देशकों का पसंदीदा शगल रहा है.
गोलमालGolmaal (2006)
वर्ष 2006 में प्रदर्शित निर्देशक रोहित शेट्टी की फिल्म “गोलमाल” प्रियदर्शन की सफल मलयालम फिल्म “कक्काकुइल” का रीमेक थी.
गोलमाल 3Golmaal 3 (2010)
भारतीय फिल्म इतिहास की यह पहली फिल्म थी जो किसी सफल फिल्म का तीसरा भाग थी.
गोलमाल रिटर्न्सGolmaal Returns (2008)
गोलमाल श्रृंखला की तिकड़ी की यह दूसरी फिल्म है जो वर्ष 2008 में प्रदर्शित हुई.
चक दे! इंडियाChak De! India (2007)
भारत में खेलों पर आधारित फिल्मे बहुत कम बनी है और जो थोड़ी बहुत फिल्में बनी भी है तो वो सभी क्रिकेट पर केन्द्रित थी ऐसे में महिला हॉकी पर आधारित एक फिल्म बनाना बहुत जोखिम से भरा काम था पर लेखक जयदीप साहनी और निर्देशक शिमित अमीन किसी और ही मिट्टी के बने हुए थे.
जंजीरZanjeer (1973)
1973 भारतीय सिने इतिहास में एक युगांतरकारी परिवर्तन का साल रहा.
जय संतोषी मांJai Santoshi Maa (1975)
बाहर करीने से सजी चप्पलों की कतारें अन्दर प्रसाद, धूप और फूल मालाएं, जी नहीं जनाब ये किसी मंदिर का दृश्य नहीं था ये तो उन सिनेमाघरों का नजारा था जहां “जय संतोषी मां” फिल्म सन 1975 में प्रदर्शित हुई.
जॉनी मेरा नामJohny Mera Naam (1970)
सन 1970 में प्रदर्शित हुई “जॉनी मेरा नाम” को देव आनंद की बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है.
ट्रेन टू पाकिस्तानTrain to Pakistan (1998)
विभाजन की त्रासदी पर लिखे गए खुशवंत सिंह के उपन्यास “ट्रेन टू पाकिस्तान” पर निर्देशिका पामेला रुक्स की इसी नाम से वर्ष 1998 में प्रदर्शित फिल्म “ट्रेन टू पाकिस्तान” एक लाजवाब ऐतिहासिक दस्तावेज है.
तारे जमीन परTaare Zameen Par (2007)
आमिर खान एक अभिनेता के रूप में तो अपना लोहा मनवा चुके हैं पर इस गजब के अभिनेता में एक बेहद संवेदनशील निर्देशक भी छुपा बैठा था इसका पता सिने प्रेमियों को लगा 2007 में जब उनके द्वारा निर्देशित यह फिल्म सिनेमाघरों में पहुंची.
तालTaal (1999)
सुभाष घई का नाम उन निर्देशकों में शुमार है जिन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक सफल फिल्में दी.
द ब्लू अम्ब्रेलाThe Blue Umbrella
रस्किन बांड के उपन्यास “ब्लू अम्ब्रेला” पर आधारित फिल्म “ब्लू अम्ब्रेला” विशाल भारद्वाज द्वारा निर्देशित एक बेहतरीन बाल फिल्म है.
दबंगDabangg (2010)
मल्टीप्लेक्स सिनेमाओं के चलन के बाद हिंदी सिनेमा में नायक की परिभाषा ही बदल गयी.
दस नंबरीDus Numbri (1976)
सन 1976 की इस सबसे कामयाब फिल्म में नायक मनोज कुमार ने “भारत” की अपनी छवि से इतर एक दस नम्बरी गुंडे की भूमिका निभा कर सबको चौंका दिया.
दिल तो पागल हैDil To Pagal Hai (1997)
हिंदी फिल्मों के इतिहास में अगर कभी भी रोमांटिक फिल्मों का जिक्र छिड़ेगा तो यश चोपड़ा का नाम सबसे पहले लिया जाएगा.
दिल है कि मानता नहींDil Hai Ki Manta Nahin (1991)
हॉलीवुड की फिल्मों से प्रेरणा ले कर हिंदी फिल्म जगत में कई सफल फिल्में बनी है.
दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगेDilwale Dulhania Le Jayenge (1995)
20 अक्टूबर 1995 को प्रदर्शित दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे हिंदी फिल्मों के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई.
दीवानाDeewana (1992)
निर्देशक राज कंवर की वर्ष 1992 में प्रदर्शित फिल्म “दीवाना” ने अपने प्रदर्शन के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता के झंडे गाड़ दिये.
दीवारDeewaar (1975)
सन 1975 में प्रदर्शित गुलशन रॉय निर्मित और यश चोपड़ा निर्देशित यह फिल्म भारतीय फिल्म उद्योग की कालजयी फिल्मों में से एक है.
देवदासDevdas (2002)
हिंदी फिल्म इतिहास में शरतचंद्र चटोपाध्याय की कालजयी कृति “देवदास” पर आधारित अब तक तीन फिल्में बन चुकी हैं.
दो रास्तेDo Raaste (1969)
हिंदी फिल्मों के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में से एक राज खोसला निर्देशित “दो रास्ते” सन 1969 में प्रदर्शित हुई.
धरम वीरDharam Veer (1977)
हिंदी फिल्म इतिहास में दोस्ती पर आधारित फिल्मों की कमी नहीं है पर “धरम वीर” का नाम सिने प्रेमी कभी नहीं भूल सकते.
धूम 2Dhoom 2 (2006)
हॉलीवुड में सीक्वल बनाने का चलन काफी पुराना है पर जहां हॉलीवुड में सीक्वल काफी पसंद किये गए हैं वहीं भारत में शुरूआती दौर में इन्हें मूल फिल्मों जैसी सफलता नहीं मिली.
नया दौरNaya Daur (1957)
भारत की आजादी के बाद का दौर मशीनीकरण का दौर था और उस वक्त बहुत से लोग मशीनों के कारण बेरोजगार हुए.
नसीबNaseeb (1981)
फार्मूला फिल्मो के दिग्गज मनमोहन देसाई हिंदी सिने प्रेमियों की नब्ज पढना जानते थे.
नागिनNagin (1954)
हिंदी फिल्म उद्योग में नाग और नागिन को केंद्र में रख कर कई लोकप्रिय फिल्में बनी है.
निःशब्दNishabd (2007)
एक अधेड़ उम्र का आदमी और एक कमसिन नवयुवती के बीच प्रेम पर बॉलीवुड में कई फिल्में बनायीं गयी जैसे “अनोखा रिश्ता”, “लम्हें” और “जॉगर्स पार्क” और निर्माता-निर्देशक रामगोपाल वर्मा की “निशब्द” भी इसी फेरहिस्त में शुमार होती है.
निकाहNikaah (1982)
बी.
परिणीताParineeta (2005)
शरत चन्द्र चटोपाध्याय हिंदी साहित्य प्रेमियों के लिए एक जाना माना नाम है.
पहेलीPaheli (2005)
राजस्थानी साहित्यकार विजयदान देथा कहानी कहने की अपनी अनोखी शैली के लिए प्रख्यात हैं.
पाPaa (2009)
अमिताभ बच्चन ने अपने फिल्मी कैरियर में हर तरह की भूमिकाएं निभाई है पर वर्ष 2009 में प्रदर्शित फिल्म “पा” में उन्होंने जो किरदार निभाया वो आज तक किसी हिंदी फिल्म अभिनेता ने नहीं निभाया था.
पिंजरPinjar (2003)
विभाजन की त्रासदी पर हिंदी फिल्म जगत में कई फिल्में बनी है जिनमें “पिंजर” का अपना एक अलग ही मुकाम है.
प्यासाPyaasa (1957)
हिंदी फिल्म इतिहास के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों की बात की जाए तो अगली पंक्ति में जो नाम दिखयी देते हैं उनमे से एक है - गुरूदत्त.
प्रतिघातPratighaat (1987)
एन.
फनाFanaa (2006)
बॉलीवुड के “मिस्टर परफेक्शनिस्ट” आमिर खान और “सुपर अदाकारा” काजोल हालांकि “इश्क” फिल्म में एक साथ काम कर चुके थे पर उन्हें पहली बार रोमांटिक भूमिकाओं में प्रस्तुत करने का श्रेय जाता है निर्माता यश चोपड़ा और आदित्य चोपड़ा और निर्देशक कुणाल कोहली की फिल्म “फना” को.
फिर हेरा फेरीPhir Hera Pheri (2006)
“फिर हेराफेरी” वर्ष 2000 में प्रदर्शित सफल फिल्म “हेरा फेरी” का अगला भाग थी.
बरसातBarsaat (1949)
चालीस के दशक की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक “बरसात” के जरिये निर्देशक राज कपूर को पहली बड़ी सफलता मिली.
बाजारBazaar (1982)
सन 1982 में विजय तलवार द्वारा निर्मित एवं सागर सरहदी लिखित और निर्देशित यह फिल्म समान्तर फिल्मों की फेरहिस्त में एक नायाब नगीना है.
बैंडिट क्वीनBandit Queen (1994)
चम्बल के बीहड़ और डकैत हिंदी फिल्म जगत के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहे हैं पर हिंदी फिल्मों में चम्बल का प्रस्तुतिकरण वास्तविकता से बहुत दूर और फंतासी आधारित रहा है.
बैजू बावराBaiju Bawra (1952)
पचास के दशक की हिट म्यूजिकल फिल्म “बैजू बावरा” हिंदी फिल्म इतिहास की एक अनमोल धरोहर है.
बॉबीBobby (1973)
दी ग्रेट शो मैन राज कपूर की इस फिल्म ने प्रेम को एक नयी परिभाषा प्रदान की.
बॉर्डरBorder (1997)
हिंदी फिल्म इतिहास में युद्ध आधारित कई फिल्में बनायीं गयी पर कोई भी फिल्म सफलता की उन ऊंचाइयों को नहीं छू पायी जो बॉर्डर ने हासिल की.
भूतBhoot (2003)
हॉलीवुड में डरावनी फिल्में बेहद कामयाब रही है और इनका अपना एक खास दर्शक वर्ग है.
मंडीMandi (1983)
श्याम बेनेगल का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है.
मकड़ीMakdee (2002)
भारत में बाल फिल्में व्यावसायिक रूप से अधिक सफल नहीं हो पाती हैं ऐसे में बॉलीवुड में निर्मित बाल फिल्में गिनती की ही हैं और जो कुछ है भी वो बेसिर पैर की कहानियों वाली और उट पटांग हरकतों से भरी हुई हैं.
मदर इंडियाMother India (1957)
महबूब खान द्वारा लिखित, निर्मित और निर्देशित यह फिल्म भारतीय फिल्म इतिहास की सर्वोत्कृष्ट फिल्मों में से एक मानी जाती है.
मधुमतीMadhumati (1958)
निर्माता-निर्देशक बिमल रॉय की सफल फिल्म “मधुमती” से भारतीय फिल्मों में पुनर्जन्म के विषय पर आधारित फिल्मों की शुरुआत हुई.
माचिसMaachis (1996)
हिंदी फिल्म इतिहास के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में से एक गुलजार की वर्ष 1996 में प्रदर्शित फिल्म “माचिस” पंजाब के आतंकवाद की पृष्ठभूमि में पुलिसिया अत्याचारों से तंग आ कर बागी बनने वाले नौजवानों की कहानी कहती थी.
मानसून वेडिंगMonsoon Wedding (2001)
पश्चिमी देशों के दर्शकों के लिए भारतीय शादियां हमेशा से आकर्षण का विषय रही हैं और प्रख्यात निर्देशिक मीरा नायर ने वर्ष 2001 में प्रदर्शित अपनी फिल्म “मॉनसून वैडिंग” के जरिये विश्व सिनेमा के दर्शकों के लिए एक खालिस पंजाबी शादी की सौगात पेश की जो फिल्म दर्शकों को खूब भाई.
मिस्टर इंडियाMr. India (1987)
भारतीय सिनेमा के यादगार खल पात्रों में यदि “गब्बर सिंह” के मुकाबले में कोई पात्र ठहरता है तो वो है “मोगेम्बो”.
मिस्टर एंड मिसेज अय्यरMr. and Mrs. Iyer (2002)
हिंदी फिल्म जगत में निर्देशन के क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व रहा है.
मुंबई मेरी जानMumbai Meri Jaan (2008)
“ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, जरा हट के, जरा बच के, ये है बॉम्बे मेरी जान” आंखों में सपने और दिलों में अरमान लिए लाखों लोगों की एक ही मंजिल है, मुंबई - सपनो का शहर, भारत की आर्थिक राजधानी.
मुकद्दर का सिकंदरMuqaddar Ka Sikandar (1978)
अमिताभ बच्चन के फिल्मी कैरियर में प्रकाश मेहरा वो नाम है जिसने उन्हें फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया.
मुगल-ए-आजमMughal-e-Azam (1960)
जब कभी हिंदी फिल्मों का इतिहास लिखा जायेगा तो मुगल ऐ आजम का नाम स्वर्णाक्षरों में दमकेगा.
मृगयाMrigayaa
निर्देशक मृणाल सेन का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है.
मैंने प्यार कियाMaine Pyar Kiya (1989)
साफ सुथरी और पारिवारिक फिल्में बनाने के लिए प्रख्यात बैनर “राजश्री फिल्म्स” की कमान जब 1989 में सूरज बडजात्या के नौजवान हाथों में आई तो पहली बार राजश्री फिल्म्स ने बड़े बजट की फिल्मों की तरफ रुख किया और सूरज की निर्देशित पहली फिल्म “मैंने प्यार किया” ने ही बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी की नई इबारत लिख डाली.
मोहब्बतेंMohabbatein (2000)
सन 2000 में प्रदर्शित निर्माता यश चोपडा और निर्माता आदित्य चोपड़ा की फिल्म “मोहब्बतें” से हिंदी फिल्मों के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी दूसरी पारी में सफलता का स्वाद फिर से चखा.
मोहराMohra (1994)
राजीव रॉय एक ऐसे निर्देशक हैं जो मल्टीस्टारर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं “युद्ध”, त्रिदेव “और” विश्वात्मा “जैसी फिल्मों के बाद वर्ष 1994 में प्रदर्शित उनकी फिल्म” मोहरा “भी इसी श्रृंखला की अगली कड़ी है.
रंग दे बसंतीRang De Basanti (2006)
आज के दौर की अधिकतर फिल्में मल्टीप्ल्केस के युवा दर्शकों को ध्यान में रख कर बनायीं जाती है पर उनकी कहानी वही कॉलेज रोमांस, मौज मस्ती या फिर चुहलबाजी तक ही सीमित होती हैं.
रंगीलाRangeela (1995)
वर्ष 1995 में प्रदर्शित “रंगीला” कई मामलों में अनूठी थी.
रतनRattan (1944)
साल 1944 में प्रदर्शित फिल्म रत्तन अपने समय की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक थी.
रब ने बना दी जोड़ीRab Ne Bana Di Jodi (2008)
“दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगें” और “मोहब्बतें” जैसे सुपर हिट फिल्में दे चुके निर्देशक आदित्य चोपड़ा से दर्शकों की बेहद उम्मीदें जुडी हुई थी और उन उम्मीदों पर खरा उतरते हुए वर्ष 2008 में प्रदर्शित “रब ने बना दी जोड़ी” के जरिये आदित्य ने सफलता की तिकड़ी पूरी की.
राजनीतिRaajneeti (2010)
निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा की यह फिल्म भारतीय राजनीति की एक जीवंत तस्वीर दर्शकों के सामने रखती है.
राजा हिंदुस्तानीRaja Hindustani (1996)
एक गरीब लड़के और अमीर लड़की प्रेम कहानी पर सैकड़ों हिंदी फिल्में बन चुकी हैं, हिंदी फिल्मों के इस आजमाए हुए हिट फार्मूले पर फिल्मे बनना अभी भी बदस्तूर जारी है.
राम तेरी गंगा मैलीRam Teri Ganga Maili (1985)
भारतीय फिल्म निर्माण को एक नया आयाम देने वाले शो मैन राज कपूर ने इस फिल्म के जरिये अपने सबसे छोटे बेटे राजीव कपूर को हिंदी सिने दर्शकों के रूबरू करवाया.
रोटी कपड़ा और मकानRoti Kapda Aur Makaan (1974)
मनोज कुमार उन चुनिंदा निर्देशकों में से एक हैं जो समकालीन समस्याओं पर आधारित फिल्में बनाने के लिए जाने जाते है.
लगानLagaan (2001)
सन 2001 में जहां एक और अनिल शर्मा की “गदर एक प्रेम कथा” ने अपनी सफलता का परचम लहराया वहीं उसी सप्ताह प्रदर्शित हुई निर्माता आमिर खान और निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की “लगान” ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी सफलता के झंडे गाड़ दिए.
लगे रहो मुन्नाभाईLage Raho Munna Bhai (2006)
एक कामयाब फिल्म के बाद उस सफलता को बरकरार रखना एक बड़ी चुनौती होता है और ऐसी ही चुनौती से रूबरू थे निर्माता विधु विनोद चोपड़ा और निर्देशक राजकुमार हीरानी.
वक्तWaqt (1965)
साल 1965 की सबसे कामयाब फिल्म “वक्त” से हिंदी सिनेमा में मल्टीस्टारर फिल्मों का दौर शुरू हुआ.
विरासतVirasat (1997)
दक्षिण भारतीय भाषाओं में कामयाब फिल्मों को हिंदी में बनाने की परम्परा हिंदी फिल्मों में काफी पुरानी है.
विवाहVivah (2006)
मल्टीप्लेक्सों की बढती संख्या और लोकप्रियता के साथ ही हिंदी फिल्मकारों ने अपनी फिल्मों महानगरों के दर्शकों को ध्यान में रख कर बनानी शुरू कर दी ऐसे में जब राजश्री प्रोडक्शनस ने अरेंज्ड मैरिज के विषय पर आधारित फिल्म “विवाह” को वर्ष 2006 में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया तो फिल्म उद्योग के जानकारों की इसकी सफलता पर संदेह था पर दर्शकों ने फिल्म को हाथों हाथ लिया और फिल्म 2006 की ही नहीं बल्कि हिंदी फिल्म इतिहास के सबसे कामयाब फिल्मों में से एक साबित हुई.
शोलेSholay (1975)
कहा जाता है की ब्रिटिश राज का सूरज कभी अस्त नहीं होता था और उसी तरह से शोले एक ऐसी फिल्म है जिसका सूरज बॉक्स ऑफिस पर हमेशा चमकता रहेगा.
शौर्यShaurya (2008)
भारतीय सेना में धार्मिक भेदभाव के विवादित विषय पर आधारित “शौर्य” एक बेहद विचारोतेजक फिल्म है.
श्री 420Shree 420 (1955)
देश की आजादी के बाद के कुछ वर्ष में बनने वाली फिल्मों पर समाजवाद का असर बहुत गहराई से देखने को मिलता है.
संगमSangam (1964)
प्रेम त्रिकोण, हिंदी फिल्मों का पसंदीदा विषय रहा है और इस पर अब तक सैंकड़ों फिल्में बन चुकी है पर आज भी अगर प्रेम त्रिकोण आधारित फिल्मों को जब जिक्र छिड़ता है तो मुंह से निकलने वाला पहला नाम जिस फिल्म का होता है वो है संगम.
संघर्षSangharsh (1999)
हिंदी फिल्म जगत में की कुछ गिनी चुनी महिला निर्देशकों में से एक निर्देशिका तनूजा चंद्रा की वर्ष 1999 में प्रदर्शित फिल्म “संघर्ष” हॉलीवुड फिल्म “साइलेंस ऑफ लैम्ब्स” से प्रेरित थी.
सत्याSatya (1998)
मुंबई अपराध जगत और इसके सरगना हमेशा हिंदी फिल्म निर्देशकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहे हैं.
सरकारSarkar (2005)
विश्वप्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्म “गॉडफादर” से प्रेरणा ले कर बॉलीवुड में कई फिल्में बनी है इन फिल्मों की फेरहिस्त में “सरकार” अलग खड़ी दिखाई देती है.
सरफरोशSarfarosh (1999)
भारत में पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को केंद्र में रख कर बनाई गई निर्माता-निर्देशक जोन मैथ्यू मथान की फिल्म “सरफरोश” वर्ष 1999 में प्रदर्शित हुई.
साथियाSaathiya (2002)
वर्ष 2002 में प्रदर्शित हुई फिल्म “साथिया” से बॉलीवुड में एक बेहद प्रतिभावान निर्देशक शाद अली ने अपना फिल्मी सफर शुरू किया.
सारांशSaaransh (1984)
निर्देशक महेश भट्ट, उन चुनिन्दा निर्देशकों में से एक है जो अपनी फिल्मों में बड़े सितारों की बजाय अच्छी कहानी को ज्यादा महत्व देते हैं.
सीता और गीताSeeta Aur Geeta (1972)
जुड़वां भाइयों पर तो हिंदी सिनेमा में कई फिल्में बनी थी पर जुड़वां बहनों की कहानी को पहली बार परदे पर उतारा निर्माता जी.
हम आपके हैं कौनHum Aapke Hain Koun..! (1994)
हिंदी सिने प्रेमियों के लिए राजश्री फिल्म्स एक जाना पहचान नाम है.
हम दिल दे चुके सनमHum Dil De Chuke Sanam (1999)
इस समय के श्रेष्ठ हिंदी फिल्म निर्देशकों की बात की जाए तो संजय लीला भंसाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है.
हम साथ साथ हैंHum Saath-Saath Hain (1999)
साफ सुथरी और पारिवारिक फिल्मों के दर्शकों के लिए राजश्री प्रोडक्शंस एक जाना पहचाना नाम है.
हम हैं राही प्यार केHum Hain Rahi Pyar Ke (1993)
महेश भट्ट उन निर्देशकों में से हैं जिन्होंने हमेशा लीक से हटकर किसी नए विषय पर फिल्म बनाने का साहस किया है और वर्ष 1993 में प्रदर्शित हुई उनकी फिल्म “हम हैं राही प्यार के” में भी यही सिलसिला जारी रहा.
हेरा फेरीHera Pheri (2000)
निर्माता ऐ.
हैदराबाद ब्लूजHyderabad Blues (1998)
वर्ष 1998 में अमेरिका से लौटे एक इंजीनियर नागेश कुकनूर ने अपने मित्रों और सम्बन्धियों को लेकर एक प्रयोगधर्मी फिल्म बनायीं “हैदराबाद ब्लूज”.

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🛡️ SANGOPANG ज्ञानकोष · संपादकीय समीक्षा: अक्टूबर 2026
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