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मुगल-ए-आजम

Mughal-e-Azam (1960) · सिनेमा

फिल्मसिनेमा
सार

जब कभी हिंदी फिल्मों का इतिहास लिखा जायेगा तो मुगल ऐ आजम का नाम स्वर्णाक्षरों में दमकेगा.

प्रदर्शन वर्ष1960
निर्देशकके. आसिफ
संगीतनौशाद

विस्तार

के. आसिफ निर्मित एवं निर्देशित मुगल ऐ आजम, भारत के मुगल शासक अकबर के साहबजादे सलीम और एक अदना कनीज ( नौकरानी ) के प्यार की एक गल्प कथा पर आधारित थी. आसिफ के इस महत्वाकांक्षी सपने को पूरा करने में 16 साल का समय लगा.

सन 1944 में फिल्म का निर्माण शुरू किया गया तो मुख्य भूमिकाओं में थे चन्द्रमोहन, सप्रू और नर्गिस. पर देश के विभाजन के कारन के. आसिफ का यह सपना पूरा नहीं हो सका और सन 1951 में फिल्म जब दुबारा शुरू हुई तो मुख्य भूमिकाओ में थे पृथ्वीराज कपूर, दिलीप कुमार और मधुबाला.

फिल्म के अविस्मरनीय गीतों को लिखा था शकील बंदायूनी ने और इन्हें मधुर स्वरों में ढाला था नौशाद साहब ने. यह अपने समय की सबसे महंगी फिल्म थी. फिल्म को बनने में इतना समय लगा की श्वेत श्याम फिल्में बीते दौर की बात हो चुकी थी इसलिए फिल्म की तीन रील्स ईस्टमैन कलर में फिल्माई गयी.

भव्य सेट्स, भारी भरकम स्टार कास्ट, असंख्य जूनियर कलाकारों के साथ अमान, कमाल अमरोही, के. आसिफ, वजाहत मिर्जा और एहसान रिजवी द्वारा लिखित यह फिल्म अपने शानदार उर्दू संवादों के लिए भी याद की जाती है. शीश महल में फिल्माया गया “जब प्यार किया तो डरना क्या” गीत भारतीय फिल्म इतिहास के सर्वश्रेष्ठ प्रेमगीतों के शिखर पर गिना जाता है.

दुर्गा खोटे, अजित, निगार सुल्ताना, मुराद, जिल्लो बाई, एम्. कुमार और जलाल आगा ने फिल्म में चरित्र भूमिकाएं अभिनीत की और उस साल के फिल्मफेयर पुरस्कारों में फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार जीता. फिल्म को सन 1961 का सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.

हिंदी सिने प्रेमियों के दिलों पर आज भी यह फिल्म राज करती है इसका प्रमाण तब मिला जब साल 2004 में इसे रंगीन बना कर दुबारा रिलीज किया गया तो उसे भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला.

दूसरे नाम और खोज-शब्द

Mughal-e-Azammughal-e-azam filmमुगले आजम

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