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शोले

Sholay (1975) · सिनेमा

फिल्मसिनेमा
सार

कहा जाता है की ब्रिटिश राज का सूरज कभी अस्त नहीं होता था और उसी तरह से शोले एक ऐसी फिल्म है जिसका सूरज बॉक्स ऑफिस पर हमेशा चमकता रहेगा.

प्रदर्शन वर्ष1975
निर्देशकरमेश सिप्पी
संगीतआर.डी. बर्मन

विस्तार

भारतीय फिल्म उद्योग की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक, इस फिल्म ने सफलता के नए प्रतिमान स्थापित किये और अपने किरदारों को अमरत्व प्रदान किया. आज भी लोग “जय”, “वीरू”, “बसंती”, “कालिया”, “साम्भा”, “अंग्रेजो के जमाने के जेलर” और सबसे बढ़कर “गब्बर सिंह” को नहीं भूलें हैं.

सलीम जावेद की करिश्माई लेखनी का शाहकार शोले, सन 1975 में प्रदर्शित हुई और रमेश सिप्पी निर्देशित और जी. पी. सिप्पी निर्मित इस फिल्म ने कामयाबी की नयी इबारत लिख डाली. संजीव कुमार, धर्मेन्द्र, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, जया भादुड़ी, अमजद खान, असरानी, जगदीप, ऐ. के.

हंगल, सत्येन्द्र कपूर, लीला मिश्रा, विजू खोटे, मैक मोहन और केश्टो मुखर्जी की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म बी. बी. सी. इंडिया द्वारा “सहस्त्राब्दी की फिल्म” के खिताब से नवाजी गई है. फिल्म के गीत आनंद बक्षी ने लिखे और इन्हें संगीतबद्ध किया था आर. डी. बर्मन ने.

मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमा में फिल्म ने पांच साल लगातार चलने का कीर्तिमान स्थापित किया. फिल्म के संवादों ने धूम मचा दी और इसके संवादों की ऑडियो कैसेट भी खूब बिकीं.

“कितने आदमी थे?” “जो डर गया समझो मर गया” और “तेरा क्या होगा कालिया” जैसे संवादों ने गब्बर सिंह को भारतीय सिनेमा का सबसे पसंदीदा खल पात्र बना दिया. इतनी सफल फिल्म पर हैरानी की बात है की उस साल के फिल्मफेयर पुरस्कारों में फिल्म कोई भी उल्लेखनीय पुरस्कार नहीं जीत पायी और इसे सिर्फ सर्वश्रेष्ठ संपादन का पुरस्कार मिला.

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