भारत की आजादी के बाद का दौर मशीनीकरण का दौर था और उस वक्त बहुत से लोग मशीनों के कारण बेरोजगार हुए.
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समसामयिक विषयों को अपनी फिल्मों में प्रस्तुत करने में माहिर निर्माता- निर्देशक बी. आर. चोपड़ा ने उस समय के इस ज्वलंत मुद्दे को अपनी फिल्म में बेहद संजीदगी और कामयाबी के साथ पेश किया. फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई दिलीप कुमार, वैजयन्तिमाला, अजित, चांद उस्मानी, जीवन, मनमोहन कृष्ण, जॉनी वॉकर ने.
फिल्मके गीत साहिर लुधयानवी ने लिखे और उसे सुरों में सजाया ओ.पी. नैयर ने. फिल्म के संगीत ने धूम मचा दी. “ये देश है वीर जवानों का”, “उड़े जब जब जुल्फें तेरी”, “साथी हाथ बढ़ाना” और “मांग के साथ तुम्हारा” जैसे गीतों का ही जलवा था की उस साल का सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक का फिल्मफेयर पुरस्कार ओ. पी.
नैयर को मिला. फिल्म ने इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ अभिनेता ( दिलीप कुमार ) और सर्वश्रष्ठ कहानी ( अख्तर मिर्जा ) के फिल्मफेयर भी जीते. इस कहानी पर फिल्म बनाने से उस वक्त के हर स्थापित निर्माता ने मना कर दिया था क्योंकि उन्हें लगता था की ऐसे विषय पर बनी फिल्म सफल नहीं हो पायेगी पर बी. आर.
चोपड़ा भी अपनी धुन के पक्के थे उन्होंने यह फिल्म बनायीं और इस फिल्म ने कामयाबी की एक नयी इबारत लिख डाली.
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