पचास के दशक की हिट म्यूजिकल फिल्म “बैजू बावरा” हिंदी फिल्म इतिहास की एक अनमोल धरोहर है.
विस्तार
संगीत सम्राट तानसेन और बैजू बावरा के मिथकीय संगीत मुकाबले पर आधारित यह फिल्म 1952 में प्रदर्शित हुई और बॉक्स ऑफिस पर छा गयी. फिल्म का निर्माण किया प्रकाश पिक्चर्स ( विजय भट्ट और शंकर भट्ट ने ) और फिल्म का निर्देशन किया विजय भट्ट ने. फिल्म की कहानी लिखी थी रामचन्द्र ठाकुर ने और स्क्रीनप्ले लिखा आर. एस.
चौधरी ने. फिल्म के संवाद लिखे जिया सरहदी ने. फिल्म के गीत लिखे शकील बंदायूनी ने और संगीत दिया नौशाद ने. “बैजू बावरा” का संगीत नौशाद साहब के फिल्मी कैरियर की सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक गिना जाता है.
“तू गंगा की मौज मैं जमुना की धारा”, “मन तडपत है हरी दर्शन को आज”, “मोहे भूल गए सावंरिया”, “ओ दुनिया के रखवाले”, “बचपन की मोहब्बत”, “झूले में पवन के आई बहार”, “आज गावत मन मेरो” और “घनन घनन घन गरजो रे” जैसे गीत भारतीय फिल्म संगीत के खजाने के बहुमूल्य नगीने हैं.
फिल्म में नौशाद ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के रागों पर आधारित गीतों की रचना की. यह उन कुछ फिल्मों में से एक हैं जिनमे भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गज उस्ताद अमीर खान और डी. वी. पलुस्कर ने गाया है. फिल्म को दर्शकों ने बेशुमार प्यार दिया.
फिल्म में बैजू की भूमिका निभाई भारत भूषण ने और उनकी प्रेमिका गौरी की भूमिका में थी मीना कुमारी. अन्य मुख्य भूमिकाओं में थे सुरेंदर, कुलदीप कौर, बिपिन गुप्ता, मनमोहन कृष्ण, बी.एम. व्यास, मिश्रा, राधा कृष्ण, रत्तन कुमार और बेबी तबस्सुम. अपने अविस्मरणीय संगीत और बेहतरीन अदाकारी के लिए “बैजू बावरा” हमेशा सिने प्रेमियों के दिलों में बसी रहेगी.
दूसरे नाम और खोज-शब्द
जुड़े विषय
🧠 अब GK में परखें
🛡️ SANGOPANG ज्ञानकोष · संपादकीय समीक्षा: अक्टूबर 2026
कोई त्रुटि/विसंगति हो तो कृपया बताएं!
