बाहर करीने से सजी चप्पलों की कतारें अन्दर प्रसाद, धूप और फूल मालाएं, जी नहीं जनाब ये किसी मंदिर का दृश्य नहीं था ये तो उन सिनेमाघरों का नजारा था जहां “जय संतोषी मां” फिल्म सन 1975 में प्रदर्शित हुई.
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फिल्म समीक्षकों के सभी अनुमानों को धत्ता बत्ताते हुए फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता का एक नया अफसाना रच दिया. सन 1975 में “शोले” और “दीवार” जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सामने एक बेहद कम बजट की इस फिल्म ने चमत्कारी सफलता प्राप्त कर सभी को चौंका दिया.
फिल्म की कहानी उत्तर भारत में प्रचलित एक व्रत की कथा पर आधारित थी. फिल्म का निर्माण किया सतराम रोहेरा ने और निर्देशन की कमान संभाली विजय शर्मा ने. फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई भारत भूषण, कानन कौशल, आशीष कुमार, अनीता गुहा, त्रिलोक कपूर, रजनी बाला, बी.एम.
व्यास, दिलीप दत्त, लीला मिश्र, राजन हक्सर, प्द्मारानी, महिपाल, बेला बोस, मनहर देसाई और रामायण तिवारी ने. फिल्म का संगीत दिया थे सी. अर्जुन ने और गीत लिखे थे कवि प्रदीप ने.
मन्ना डे, उषा मंगेशकर, महेंद्र कपूर और स्वयं कवि प्रदीप की आवाजों में सजे फिल्म के सभी गीत बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी संतोषी माता के मंदिरों में गाये जाते है.
“करती हूं तुम्हारा व्रत में”, “मैं तो आरती उतारूं रे”, “यहां वहां मत पूछों कहां कहां” और “मदद करो संतोषी माता” जैसे गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों को भक्ति भाव से भर देते हैं. फिल्म के प्रदर्शन से तब तक बेहद कम चर्चित देवी संतोषी माता घर-घर में पूजी जाने लगी.
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