हिंदी फिल्मों के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों में से एक राज खोसला निर्देशित “दो रास्ते” सन 1969 में प्रदर्शित हुई.
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मराठी उपन्यासकार चंद्रकांत काकोदकर लिखित एक उपन्यास पर आधारित फिल्म की कहानी एक संयुक्त परिवार के बिखराव और अंत में सुखद मिलाप को दर्शाती थी. दर्शकों ने फिल्म को बेहद सराहा और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए रिकार्ड्स स्थापित कर दिए.
फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे बलराज साहनी, राजेश खन्ना, मुमताज, प्रेम चोपड़ा, बिंदु, असित सेन, कामिनी कौशल, जयंत और जूनियर महमूद. फिल्म का स्क्रीनप्ले लिखा था जी. आर. कामत और संवाद लिखे थे अख्तर रोमानी ने. फिल्म की सुपर सफलता में बहुत बड़ा हाथ लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के संगीत का भी था.
“ये रेशमी जुल्फें”, “खिजां के फूल पे आती कभी बहार नहीं”, “छुप गए सारे नजारे” और “बिंदिया चमकेगी” जैसे गीतों ने संगीत प्रेमियों को अपने जादू में बांध लिया. इन सुपरहिट गीतों को अल्फाजों में ढाला आनंद बक्षी ने. फिल्म को सर्वश्रेष्ठ कहानी ( चंद्रकांत काकोदकर ) का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला.
अभिनेता अनुपम खेर की निर्देशक के रूप में पहली फिल्म “ओम जय जगदीश” भी “दो रास्ते” पर ही आधारित थी. फिल्म को हमेशा अपनी शानदार अदाकारी, कुशल निर्देशन और कमाल के संगीत के लिए याद रखा जाएगा.
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