विभाजन की त्रासदी पर हिंदी फिल्म जगत में कई फिल्में बनी है जिनमें “पिंजर” का अपना एक अलग ही मुकाम है.
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पंजाबी की प्रख्यात साहित्यकार अमृता प्रीतम के उपन्यास पर आधारित निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी की यह दिल को छू लेने वाली फिल्म वर्ष 2003 में प्रदर्शित हुई. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर उतनी सफलता नहीं पायी पर दर्शकों और समीक्षकों ने फिल्म को बेहद सराहा. फिल्म का निर्माण किया लकी स्टार प्रोडक्शन ने.
फिल्म में बंटवारे के दर्द को निर्देशक ने बेहद संजीदगी के साथ प्रस्तुत किया और कलाकारों ने अपने जीवंत अभिनय से फिल्म को बेहद मार्मिक बना दिया है. पंजाबी पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी विभाजन के समय बिछड़े परिवारों की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करती है.
फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे मनोज बाजपेयी, उर्मिला मातोंडकर, संजय सूरी, ईशा कोप्पिकर, संदली सिन्हा, प्रियांशु चटर्जी, लिलेट दुबे, कुलभूषण खरबंदा, फरीदा जलाल, आलोक नाथ, दीना पाठक, सुधा शिवपुरी और प्रदीप कुकरेजा. फिल्म का संगीत दिया था उत्तम सिंह ने और गीत लिखे थे गुलजार ने.
अमृता प्रीतम और जेहरा निगाह की कविताओं का भी फिल्म में प्रयोग किया गया. फिल्म के गीत बेहद पसंद किये गए. खास तौर पर “मार उड़ारी”, “हाथ छूटे तो रिश्ते नहीं टूटा करते” और “वतना वे”. फिल्म में अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए मनोज बाजपेयी को राष्ट्रीय पुरस्कार ( विशेष जूरी पुरस्कार ) प्रदान किया गया.
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