हिंदी फिल्म जगत में निर्देशन के क्षेत्र में पुरुषों का वर्चस्व रहा है.
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पर अपर्णा सेन उन चुनिंदा महिला निर्देशकों में से एक हैं जिन्होंने ना केवल इस मिथक को तोडा बल्कि बेहद मजबूती से इस क्षेरा में अपनी पहचान एक संवेदनशील और विचारशील निर्देशिका के रूप में बनाई.
अपनी पहली फिल्म “36 चौरंगी लेन” के प्रदर्शन की इक्कीस साल बाद उन्होंने अपनी दूसरी फिल्म “मिस्टर एंड मिसेज अय्यर” दर्शकों के सामने प्रस्तुत की. “मिस्टर एंड मिसेज अय्यर” का निर्माण किया एन. वेंकटेशन और रुपाली मेहता ने.
फिल्म 2001 में अमेरिका में हुए आतंकारी हमले और गुजरात में हुए साम्प्रदायिक दंगों की पृष्ठभूमि में दो अजनबी सहयात्रियों की कहानी थी जो एक ही बस में सवार होते हैं और पूरी कहानी इन दो किरदारों के सफर के इर्द गिर्द चलती है. फिल्म की कहानी अपर्णा सेन ने दुलाल डे के साथ मिलकर लिखी.
फिल्म वर्ष 2002 में प्रदर्शित हुई और समीक्षकों ने मुक्त कंठ से फिल्म की सराहना की. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को औसत कामयाबी ही मिली. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे राहुल बोस, कोंकना सेन शर्मा, भीष्म साहनी, सुरेखा सीकरी, अंजन दत्ता, भरत कौल, निहारिका सेठ, रिद्धि बासु, ऋचा व्यास और इडन दास.
फिल्म का संगीत दिया विश्वप्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन ने. “मिस्टर एंड मिसेज अय्यर” ने कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किये. फिल्म को राष्ट्रीय एकता पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म का नर्गिस दत्त राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ. इसी के साथ साथ हवाई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में फिल्म को सर्वश्रेष्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ.
“मिस्टर एंड मिसेज अय्यर” एक दिल को छू लेने वाली फिल्म है जो दर्शकों के जहन में हमेशा बनी रहेगी.
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