देश की आजादी के बाद के कुछ वर्ष में बनने वाली फिल्मों पर समाजवाद का असर बहुत गहराई से देखने को मिलता है.
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निर्माता-निर्देशक राज कपूर की “श्री 420” भी ऐसी ही फिल्म है. फिल्म एक ऐसे गरीब नौजवान की कहानी पर आधारित थी जो सपनो की नगरी मायानगरी मुंबई (उस वक्त की बम्बई ) में अपने सपनों को पूरा करने के लिए आता है. ख्वाजा अहमद अब्बास और वी. पी.
साठे लिखित इस फिल्म की कहानी चार्ली चैपलिन की “लिटिल ट्रैम्प” से प्रेरित थी. राज कपूर, नर्गिस, ललिता पंवार, नादिरा और इफ्तेखार की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी बेहद कामयाब रही. फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन का था और गीत शैलेन्द्र ने लिखे थे. फिल्म का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ.
“मेरा जूता है जापानी”, “रमैया वास्ता वैय्या” और “मुड़ मुड़ के न देख” जैसे गीत आज भी सिने प्रेमियों के दिलों में बरकरार है. “प्यार हुआ इकरार हुआ” गीत तो आज भी प्रेमियों का मनपसंद गीत है.
फिल्म ने राज कपूर को रूस में पंडित नेहरु के बराबर लोकप्रिय कर दिया और “मेरा जूता है जापानी” रूस में बच्चे बच्चे की जुबान पर चढ़ गया. फिल्म को दो फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुए. 1955 में प्रदर्शित हुई “श्री 420” ने व्यावसायिक सफलता के साथ समीक्षकों की सराहना भी हासिल की.
इसी फिल्म की कहानी पर सन 1992 में अजीज मिर्जा ने शाहरुख खान को लेकर फिल्म “राजू बन गया जेंटलमैन” बनाई.
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