पहाड़ों में बलखाती एक रेल की पटरी और उस पर धुआं उड़ाती एक रेलगाड़ी, उस रेलगाड़ी के एक डिब्बे की खिड़की से झांकती एक हसीना और पटरी की साथ दौड़ती सड़क पर एक खुली जीप में माउथआर्गन बजाता एक नौजवान और फिजां में गूंज रहा था “मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू”.भारतीय सिनेमा में इस दृश्य ने एक नए युग की शुरुआत का उद्घोष किया था.
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सदी का पहला सुपरस्टार (राजेश खन्ना) इसी तरह से परदे पे अवतरित हुआ. हालांकि राजेश खन्ना की शुरुआती फिल्में “आखिरी खत” और “राज” थीं पर उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचाया “आराधना” ने. निर्माता निर्देशक शक्ति सामंत की इस फिल्म ने 1969 में बॉक्स ऑफिस पर सफलता का नया इतिहास लिख दिया.
हॉलीवुड की सफल फिल्म “टू ईच हिज ऑन” पर आधारित इस फिल्म को लिखा था सचिन भौमिक ने. फिल्म में राजेश खन्ना दोहरी भूमिका में थे. वहीं उनका साथ निभाया था शर्मीला टैगोर, अशोक कुमार, सुजीत कुमार, फरीदा जलाल, पहाड़ी सान्याल, असित सेन, मदन पुरी, अनीता दत्त, अभि भट्टाचार्य और मनमोहन ने. फिल्म का संगीत एस. डी.
बर्मन ने दिया था और गीत लिखे थे आनंद बक्षी ने. फिल्म के गीतों ने तहलका मचा दिया. “मेरे सपनों की रानी”, “कोरा कागज था ये मन”, “रूप तेरा मस्ताना”, “गुनगुना रहे है भंवरे” और “बागों में बहार है” जैसे मधुर गीतों ने हर किसी का मन मोह लिया.
इस फिल्म के जरिये किशोर कुमार को नया जीवनदान मिला और वे राजेश खन्ना की आवाज बन गए. “रूप तेरा मस्ताना” के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ गायक का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला. इसके अलावा फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर भी अपने नाम किये.
हिंदी फिल्मों में जब भी परदे पर रोमांस की बात होगी तो “आराधना” के जिक्र के बिना वो अधूरी ही रहेगी.
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