SANGOPANG

संगम

Sangam (1964) · सिनेमा

फिल्मसिनेमा
सार

प्रेम त्रिकोण, हिंदी फिल्मों का पसंदीदा विषय रहा है और इस पर अब तक सैंकड़ों फिल्में बन चुकी है पर आज भी अगर प्रेम त्रिकोण आधारित फिल्मों को जब जिक्र छिड़ता है तो मुंह से निकलने वाला पहला नाम जिस फिल्म का होता है वो है संगम.

प्रदर्शन वर्ष1964
निर्देशकराज कपूर
संगीतशंकर-जयकिशन

विस्तार

निर्माता राज कपूर की पहली रंगीन फिल्म संगम सन 1964 में प्रदर्शित हुई. फिल्म हिंदी फिल्मों के लिहाज से असाधारण रूप से लम्बी (लगभग चार घंटे) की थी पर सिने प्रेमियों को यह पहली ही नजर में भा गयी. सेंसर बोर्ड की सख्ती के उन दिनों में भी राज कपूर ने बड़ी चतुराई से फिल्म में चुम्बन दृश्य भी रखा.

इस फिल्म से राज कपूर ने एक नया चलन प्रारंभ किया- विदेशों में शूटिंग का जो बाद में हर हिंदी फिल्म की जरूरत बन गया.

इन्द्र मोहन आनंद द्वारा लिखित इस फिल्म के निर्देशक थे राज कपूर स्वयं और फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे - राज कपूर, राजेंद्र कुमार, वैजयंतीमाला, इफ्तेखार, राज मेहरा, नाना पलसीकर, ललिता पंवार, अचला सचदेव और हरि शिवदासानी. फिल्म में संगीत दिया था राज कपूर की चहेती संगीतकार जोड़ी शंकर-जयकिशन ने और गीत लिखे थे हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र ने.

फिल्म के संगीत ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की. “बोल राधा बोल संगम होगा के नहीं”, “ओ मेरे सनम”, “हर दिल जो प्यार करेगा”, “मैं का करूं राम मुझे बुड्ढा मिल गया”, “दोस्त दोस्त ना रहा” और “ये मेरा प्रेम पत्र पढ़कर” जैसे गीत भारतीय फिल्म संगीत की अनमोल धरोहर के नायाब नगीने हैं.

संगम ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री समेत चार फिल्मफेयर पुरस्कारों पर कब्जा जमाया. बेमिसाल अभिनय, कमाल की कहानी और कर्णप्रिय संगीत, इन सब ने मिलकर संगम को भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्मों में से एक का दर्जा दिलाया.

दूसरे नाम और खोज-शब्द

Sangamsangam filmवैजयंतीमालाअचला सचदेव

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