हिंदी फिल्म इतिहास के सर्वश्रेष्ठ निर्देशकों की बात की जाए तो अगली पंक्ति में जो नाम दिखयी देते हैं उनमे से एक है - गुरूदत्त.
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उनकी निर्देशन क्षमता का उम्दा नमूना है “प्यासा” जिसे टाइम पत्रिका ने “१०० सर्वश्रेष्ठ फिल्मों” की सूची में शामिल किया है. अबरार अल्वी लिखित इस फिल्म का निर्माण भी गुरूदत्त ने ही किया था. “प्यासा” को भारतीय फिल्म जगत की सबसे रोमांटिक फिल्मों में से एक गिना जाता है.
एक आदर्शवादी कवि (गुरूदत्त) और एक वेश्या (वहीदा रहमान, जो पहली बार मुख्य भूमिका में दिखी) की प्रेम कहानी पर आधारित इस फिल्म में अन्य भूमिकाएं निभाई माला सिन्हा, रहमान, जॉनी वॉकर, महमूद, कुमकुम, लीला मिश्र और टुन टुन ने. फिल्म का संगीत दिया एस. डी. बर्मन ने और गीत लिखे थे साहिर लुधयानवी ने.
फिल्म का संगीत बेहद पसंद किया गया. “जाने क्या तूने कही”, “हम आपकी आंखों में”, “सर जो तेरा चकराए” जैसे गीत अगर संगीत के लिए याद किये जाते हैं तो “ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है”, “जिन्हें नाज है हिंद पे” और “जाने वो कैसे लोग थे” जैसे गीतों में मधुरता के साथ दार्शनिकता का पुट था.
“प्यासा” व्यावसायिक दृष्टि से भी कामयाब है और कलात्मक क्षेत्र में फिल्म को बेहद सराहा गया. यह भाग्य की विडंबना ही थी कि अपने जीते जी गुरुदत्त को वो सम्मान नहीं मिला जो उन्हें उनकी मृत्यु के बाद प्राप्त हुआ.
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