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मुकद्दर का सिकंदर

Muqaddar Ka Sikandar (1978) · सिनेमा

फिल्मसिनेमा
सार

अमिताभ बच्चन के फिल्मी कैरियर में प्रकाश मेहरा वो नाम है जिसने उन्हें फर्श से अर्श तक पहुंचा दिया.

प्रदर्शन वर्ष1978
निर्देशकप्रकाश मेहरा
संगीतकल्याणजी-आनंदजी

विस्तार

मेहरा की ही फिल्म “जंजीर” से अमिताभ के सुपरस्टारडम की शुरुआत हुई. सन 1978 हुई “मुकद्दर का सिकंदर” में इन दोनों की जुगलबंदी का दर्शकों पर ऐसा जादू चला की यह उस साल की सबसे सफल और उस दशक की दूसरी सबसे कामयाब फिल्म बन गयी.

प्रकाश मेहरा निर्मित-निर्देशित इस फिल्म की कहानी लिखी थी लक्ष्मीकांत शर्मा, विजय कौल और कादर खान ने. अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना, रेखा, राखी, निरूपा रॉय, अमजद खान, रणजीत, डॉ. श्रीराम लागू और कादर खान ने फिल्म में मुख्य भूमिकायें निभाई.

फिल्म में निभाए अमिताभ के सिकंदर के किरदार और उनकी और रेखा की ऑन स्क्रीन कैमिस्ट्री ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी. फिल्म का संगीत दिया था कल्यानजी-आनंदजी की जोड़ी ने और गीतकार थे अनजान. फिल्म के संगीत को श्रोताओं से बेहद प्यार मिला और यह अत्यंत लोकप्रिय हुआ.

“रोते हुए आते हैं सब”, “दिल तो है दिल”, “सलामे इश्क मेरी जां” और “ओ साथी रे तेरे बिना भी क्या जीना” जैसे गीत हिंदी संगीत के रसिकों को आज भी झूमने पर मजबूर कर देते हैं. यह उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है जिसने उस समय सभी वितरण क्षेत्रों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यवसाय किया.

इतनी कामयाब फिल्म और ताज्जुब की बात ये है की आठ नामांकन प्राप्त करने के बावजूद फिल्म एक भी फिल्मफेयर पुरस्कार नहीं जीत पायी पर उसकी कसर फिल्म ने दर्शकों का अपार प्यार हासिल कर पूरी कर ली. यकीनन यह फिल्म अमिताभ बच्चन की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है.

दूसरे नाम और खोज-शब्द

Muqaddar Ka Sikandarmuqaddar ka sikandar filmलक्ष्मीकांत शर्मारोते हुए आते हैं सबओ साथी रे

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