बोम्बे टॉकीज निर्मित और ज्ञान मुखर्जी लिखित और निर्देशित किस्मत ४० के दशक की सबसे सफल फिल्म साबित हुई.
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1943 में बनी “किस्मत” ने हिंदी सिनेमा में एक नए युग की शुरुआत की. यह फिल्म हिंदी फिल्मों की पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म थी. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और इसने तीन साल तक एक ही सिनेमाघर में लगातार प्रदर्शन का कीर्तिमान स्थापित किया जिसे बाद में “शोले” ने तोडा.
यह पहली फिल्म थी जिसमे एंटी हीरो का किरदार परदे पर आया. पहली बार हिंदी सिनेमा में दोहरी भूमिका निभाई गयी और पहली बार किसी हिंदी फिल्म में किसी कुंवारी लड़की के गर्भवती होने जैसे साहसी विषय को प्रदर्शित किया गया. फिल्म ने हिंदी सिनेमा को अपना पहला सुपरस्टार (अशोक कुमार) दिया.
फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई थी अशोक कुमार (दोहरी भूमिका), मुमताज शांति, शाहनवाज, मुबारक, चंद्रप्रभा, डेविड, कनु रॉय, वी. एच. देसाई और पी. ऍफ. पीठावाला ने. फिल्म का संगीत दिया था अनिल बिस्वास ने और गीत लिखे थे कवि प्रदीप ने. इस फिल्म में पहली बार बिस्वास ने पहली बार भारतीय दर्शकों को फुल कोरस से रूबरू करवाया.
फिल्म के संगीत को जबरदस्त सफलता मिली. “दूर हटो ऐ दुनिया वालो हिंदुस्तान हमारा है” गीत तो स्वतंत्रता संग्राम में भी खूब गाया गया. “घर घर में दीवाली” और “धीरे धीरे आ रे बादल” जैसे गीत भी बेहद कामयाब हुए.
कड़े सेंसर नियमो के कारण फिल्म को प्रदर्शन के पहले और बाद में काफी दिक्कतें आई पर थी सिनेमा के रुपहले परदे पर फिल्म का जादू सर चढ़ कर बोला जो आज भी बरकरार है.
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