सुभाष घई का नाम उन निर्देशकों में शुमार है जिन्होंने हिंदी सिनेमा को एक से बढ़कर एक सफल फिल्में दी.
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“कालीचरण” से शुरू हुआ उनका सफलता का सिलसिला वर्ष 1999 में प्रदर्शित “ताल” में भी बदस्तूर जारी रहा. कला के व्यवसायीकरण पर आधारित “ताल” मानव ( अक्षय खन्ना ) और मानवी ( ऐश्वर्या रॉय ) की प्रेम कहानी थी. फिल्म की कहानी सुभाष घई की थी जबकि स्क्रीनप्ले खुद घई और सचिन भौमिक ने लिखा.
संवाद लिखने में घई का साथ निभाया जावेद सिद्दीकी ने. “ताल” ने भारत के साथ साथ विदेशों में भी खासी लोकप्रियता हासिल की. अमेरिका और ब्रिटेन में फिल्म ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किये.
अनिल कपूर, अक्षय खन्ना, ऐश्वर्या रॉय, आलोक नाथ, अमरीश पुरी, सुषमा सेठ, मीता वशिष्ठ, सौरभ शुक्ला, पुनीत वशिष्ठ और मनोज पाहवा ने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई. “ताल” का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ. संगीत के जादूगर ऐ. आर. रहमान ने आनंद बक्षी के बोलों पर एक जादुई तिलिस्म की रचना की जिसने संगीत प्रेमियों को मदमस्त कर दिया.
“ताल से ताल मिला”, “इश्क बिना क्या जीना यारो”, “कहीं आग लगे लग जाए”, “मैं रमता जोगी”, “नहीं सामने ',” करिए ना “और” नी मैं समझ गयी “जैसे गीत हर संगीत प्रेमी की जुबान पर चढ़ गए. उस साल के संगीत के सभी प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार” ताल “के नाम रहे.
फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ संगीतकार और सर्वश्रेष्ट गीतकार समेत छह फिल्मफेयर अपने नाम किये.” ताल “के जरिये सुभाष घई ने” शो मैन " का अपना खिताब बरकरार रखा.
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