हिंदी सिनेमा अस्सी के दशक में एक अजीब दौर से गुजर रहा था.
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इस दौर में मल्टी स्टारर फिल्मों का चलन बहुत बढ़ गया. हिंसा और मारधाड़ के अतिरेक से दर्शक त्रस्त हो रहे थे और सार्थक सिनेमा कहीं खो सा गया था. ऐसे में वर्ष 1986 में निर्देशक एन. चंद्रा अपनी फिल्म “अंकुश” ले कर दर्शकों के रूबरू हुए. “अंकुश” ने तत्कालीन भारत की एक सच्ची तस्वीर दर्शकों के सामने रखी.
बेरोजगारी, भूख, गरीबी से जूझता इस देश का आम इंसान और उसके अन्दर जल रही गुस्से की अग्नि को निर्देशक एन. चंद्रा ने बेहद ईमानदारी से परदे पर उकेरा. फिल्म की कहानी लिखी स्वयं एन. चंद्रा ने. सुभाष आर. दुर्गाकर के साथ फिल्म का निर्माण का जिम्मा भी एन. चंद्रा ने ही उठाया. फिल्म दर्शकों को बेहद पसंद आई.
खासतौर पर मुंबई और महाराष्ट्र में फिल्म ने बम्पर कमाई की. फिल्म में बड़े नाम नहीं थे पर हर कलाकार ने अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय किया. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे, नाना पाटेकर, राबिया अमीन, राजा बुंदेला, अर्जुन चक्रबर्ती, मदन जैन, निशा पलसीकर, आशालता, महावीर शाह और सैयद ने.
फिल्म का गीत “इतनी शक्ति हमें देना दाता” बेहद लोकप्रिय हुआ. संगीतकार कुलदीप सिंह की यह रचना हर स्कूल की प्रार्थना सभा में आज भी गाई जाती है. फिल्म का विषय, कलकारों का जीवंत अभिनय और एन. चंद्रा का निर्देशन ने “अंकुश” को एक यादगार फिल्म बना दिया.
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