वर्ष 1951 में प्रदर्शित हुई यह फिल्म भारतीय फिल्म उद्योग में मील का एक पत्थर मानी जाती है.
विस्तार
राज कपूर द्वारा निर्मित-निर्देशित यह फिल्म न केवल भारतीय उपमहाद्वीप बल्कि रूस, चीन और तुर्की में भी पसंद की गयी. समाजवाद के थीम पर रचे गए इस भावनात्मक ड्रामे ने विदेशों में भी सफलता की नयी इबारत लिख दी. इसका शीर्षक गीत “आवारा हूं” सोवियत रूस में बच्चे बच्चे की जुबान पर चढ़ गया.
इस फिल्म में पहली बार कपूर परिवार की तीन पीढियां सिनेमा के रजतपट पर दिखाई दी. जहां फिल्म की मुख्य भूमिका राज कपूर ने निभाई थी वहीं उनके पिता पृथ्वी राज कपूर भी फिल्म में महतवपूर्ण भूमिका में थे.
परन्तु केवल यही एक फिल्म है जिसमे पृथ्वीराज कपूर के पिता और राज कपूर के दादा दीवान बशेस्वरनाथ सिंह कपूर ने भी एक छोटी सी भूमिका निभाई है. नर्गिस, लीला चिटनिस, के. एन. सिंह, लीला मिश्रा, शशि कपूर ( बाल कलाकार ) ने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं.. संगीत का जिम्मा शंकर जय किशन ने उठाया है.
गीत शैलेन्द्र ने लिखे है और फिल्म की कहानी ख्वाजा अहमद अब्बास और वी. पी. साठे ने लिखी है. सन 1953 के कांस फिल्म फेस्टिवल में आवारा ग्रांड प्राइज के लिए भी नामित हुई.
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