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आर. चोपड़ा उन फिल्मकारों में से एक हैं जो अपनी फिल्मों में समाज में घटित होने वाली घटनाओं और ज्वलंत मुद्दों को उठाते रहे हैं. वर्ष 1982 में प्रदर्शित हुई उनकी फिल्म “निकाह” भी एक मुस्लिम शरिया कानून के तलाक नियमों पर एक बेहद प्रासंगिक और विचारोतेजक फिल्म थी. फिल्म में पाकिस्तानी अभिनेत्री सलमा आगा हिन्दुस्तानी दर्शकों के रूबरू हुई.
फिल्म की कहानी और संवाद डॉ. अचला नागर ने लिखे थे. फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया बी. आर. चोपड़ा ने. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे राज बब्बर, सलमा आगा, दीपक पराशर, असरानी, हिना कौसर, इफ्तेखार, चंद्रशेखर, उर्मिला भट्ट, आशालता वबगांवकर, युनुस परवेज और गूफी पेंटल.
फिल्म के गीत लिखे हसन कमाल और संगीत दिया रवि और गुलाम अली ने. फिल्म का संगीत जबरदस्त लोकप्रिय हुआ. कौन भूल सकता है “दिल के अरमां आंसुओं में बह गए”, “बीते हुए लम्हों की कसक”, “दिल की ये आरजू है कोई”, “चेहरा छुपा लिया है किसी ने हिजाब में”, “फजां भी है” और “चुपके चुपके रात दिन” जैसे गीत.
बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने आशातीत सफलता पायी. फिल्म के संवाद फिल्म की जान थे और डॉ. अचला नागर को सर्वश्रेष्ठ संवाद लेखन के लिए और सलमा आगा को “दिल के अरमां आंसुओं में बह गए” के लिए सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ.
हिंदी फिल्म इतिहास में मुस्लिम पृष्ठभूमि पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों की सूची में “निकाह” का नाम सबसे पहले आता है.
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