प्रकाश झा उन फिल्मकारों में से हैं जो समाज में होने वाली समसामयिक घटनाओं और ज्वलंत मुद्दों को अपनी फिल्मों का विषय बनाते हैं.
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अपने गृह राज्य बिहार की पृष्ठभूमि में वे बेहद विचारोत्तेजक कहानियों पर फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं. वर्ष 2005 में प्रदर्शित उनकी फिल्म “अपहरण” भी बिहार में पनप रहे अपहरण उद्योग पर केन्द्रित थी. फिल्म की कहानी और संवाद प्रकाश झा ने स्वयं लिखे. स्क्रीनप्ले लिखने में झा का साथ दिया मनोज त्यागी और श्रीधर राघवन ने.
फिल्म की कहानी एक आदर्शवादी पिता (मोहन अगाशे) और व्यवस्था के आगे घुटने टेक अपराधी बन चुके उसके पुत्र (अजय देवगन) के सिद्धांतों के अंतर्द्वंद को प्रस्तुत करती थी. बिहार में फल फूल रहे अपहरण उद्योग और उसके राजनैतिक संरक्षण को फिल्म बेहद ईमानदारी से बेनकाब करती है.
नाना पाटेकर, अजय देवगन, बिपाशा बासु, मोहन अगाशे, अयूब खान, मुकेश तिवारी, यशपाल शर्मा, अनूप सोनी, दिनकर पंडित, अखिलेन्द्र मिश्र, दयाशंकर पांडे, मुरली शर्मा और एहसान खान ने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई. फिल्म का पार्श्वसंगीत अमेरिकी संगीतकार वेन शार्प ने दिया और फिल्म के एकमात्र गीत को संगीतबद्ध किया आदेश श्रीवास्तव ने.
फिल्म के बेहतरीन स्क्रीनप्ले के लिए झा, मनोज त्यागी और श्रीधर राघवन ने सवर्श्रेष्ठ स्क्रीनप्ले का राष्ट्रीय पुरस्कार अपने नाम किया. “अपहरण” ने दो फिल्मफेयर पुरस्कारों ( सर्वश्रेष्ठ नकारात्मक भूमिका - नाना पाटेकर और सर्वश्रेष्ठ संवाद- प्रकाश झा ) पर भी कब्जा जमाया. उम्दा कहानी और कुशल निर्देशन फिल्म को आम फिल्मों से हट कर बनाते हैं.
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