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प्रतिघात

Pratighaat (1987) · सिनेमा

फिल्मसिनेमा
सार

एन.

प्रदर्शन वर्ष1987
निर्देशकएन. चंद्रा

विस्तार

चंद्रा उन चुनिन्दा निर्देशकों में से एक हैं जो अपनी फिल्म में बड़े सितारों की बजाय अच्छी कहानी पर भरोसा दिखाते हैं. “अंकुश” में उन्होंने समाज में गिरते मूल्यों और बेरोजगारी की समस्या को परदे पे उतारा और अपनी अगली फिल्म “प्रतिघात” में उन्होंने समाज में नैतिक मूल्यों के पतन और राजनीति के अपराधीकरण पर ध्यान केन्द्रित किया.

फिल्म की कहानी लिखी टी. कृष्णा ने और स्क्रीनप्ले में उनका साथ दिया खुद एन. चंद्रा ने. फिल्म की कहानी धरमपुर नाम के एक कस्बे पर केन्द्रित थी. जहां दबंग काली (चरणराज) की तूती बोलती है जो भी उसके खिलाफ आवाज उठाता है उसकी आवाज को काली हमेशा के लिए खामोश कर देता है.

जब काली के खिलाफ एक स्कूल अध्यापिका लक्ष्मी (सुजाता मेहता) खड़ी होती है तो काली भरे बाजार में उसके वस्त्रहरण कर उसे अपमानित करता है, लक्ष्मी इस अत्याचार के विरुद्ध उठ खड़ी होती है और अंत में काली को मौत के घात उतार देती है.

फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे सुजाता मेहता, अरविन्द कुमार, चरणराज, नाना पाटेकर,रोहिणी हट्टंगडी, मोहन भंडारी और अशोक सर्राफ ने. फिल्म का संगीत दिया रविन्द्र जैन ने. फिल्म वर्ष 1987 में प्रदर्शित हुई और दर्शकों ने फिल्म को बेहद पसंद किया. बॉक्स ऑफिस पर भी फिल्म ने अच्छा व्यवसाय किया.

फिल्म में सुजाता मेहता, चरणराज और नाना पाटेकर ने बेहतरीन अभिनय किया और एन. चंद्रा ने उतनी ही खूबसूरती से फिल्म का निर्देशन किया. एक बेहद प्रभावी और सार्थक फिल्म.

दूसरे नाम और खोज-शब्द

PratighaatPratighatसुजाता मेहता

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