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कोई मिल गया

Koi... Mil Gaya (2003) · सिनेमा

फिल्मसिनेमा
सार

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे निर्माता निर्देशक हुए है जो किसी खास अक्षर या विशेष शब्द से अपनी फिल्मों का नाम रखते रहे हैं.

प्रदर्शन वर्ष2003
निर्देशकराकेश रोशन
संगीतराजेश रोशन

विस्तार

ऐसे ही एक निर्माता निर्देशक हैं राकेश रोशन, जिन्हें अंग्रेजी के अक्षर “के/K” से बेहद लगाव है. एक अभिनेता के रूप में सफल पारी खेल कर जब राकेश रोशन फिल्म निर्देशन की तरफ मुड़े तो उनकी हर फिल्म का नाम इसी अक्षर से शुरू होता था.

भारत की चुनिन्दा “विज्ञान” फिल्मों में से एक “कोई मिल गया” भी उनमे से एक है. राकेश रोशन की यह फिल्म अन्तरिक्ष में से आये एक परग्रह प्राणी और एक भोले भाले नौजवान की दोस्ती पर आधारित थी.

2003 में प्रदर्शित इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी अलग कहानी, कुशल निर्देशन, कसी हुई पटकथा और मुख्य कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय के बल पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किये. खासतौर पर बच्चों को फिल्म ने अपने जादू में जकड लिया.

राकेश रोशन की कहानी का स्क्रीनप्ले लिखा सचिन भौमिक, रोबिन भट्ट और हनी ईरानी ने और संवाद लिखे जावेद सिद्दीकी ने. फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई थी ऋतिक रोशन, प्रीति जिंटा, रेखा, राकेश रोशन, प्रेम चोपड़ा, मुकेश ऋषि, राजीव वर्मा, जॉनी लीवर और रजत बेदी ने. फिल्म का संगीत बहुत लोकप्रिय हुआ.

“कोई मिल गया”, “इधर चला मैं उधर चला”, “इट्स मैजिक” और “जादू जादू” जैसे कर्णप्रिय गीतों को लिखा था देव कोहली और इब्राहीम अश्क ने और संगीत दिया राजेश रोशन ने. फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक सहित पांच फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुए.

फिल्म की सफलता से प्रेरित हो रोशन ने इसका अगला भाग “क्रिश” के नाम से बनाया. फिल्म वर्ष 2003 की सबसे कामयाब और दशक की दस सबसे कामयाब फिल्मों में से एक है.

दूसरे नाम और खोज-शब्द

Koi... Mil Gayakoi mil gaya filmइधर चला मैं उधर चला

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कभी खुशी कभी गमवर्तमान समय में जब नए फिल्मकार हिंदी फिल्मों में उन्मुक्तता और शालीनता की सीमायें लांघ रहे है तो ऐसे में साथ के दशक की फिल्मों की शालीनता और सरसता को परदे पर जिन्दा रखने वाले निर्देशकों में से एक नाम है निर्देशक करण जौहर.रंग दे बसंतीआज के दौर की अधिकतर फिल्में मल्टीप्ल्केस के युवा दर्शकों को ध्यान में रख कर बनायीं जाती है पर उनकी कहानी वही कॉलेज रोमांस, मौज मस्ती या फिर चुहलबाजी तक ही सीमित होती हैं.क्रिशहॉलीवुड में सुपर हीरो आधारित फिल्में बनाने का चलन आम है पर भारतीय फिल्मोद्योग को अपना पहला सुपर हीरो पाने के लिए सन 2006 तक इंतजार करना पड़ा.दस नंबरीसन 1976 की इस सबसे कामयाब फिल्म में नायक मनोज कुमार ने “भारत” की अपनी छवि से इतर एक दस नम्बरी गुंडे की भूमिका निभा कर सबको चौंका दिया.

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