इस समय के श्रेष्ठ हिंदी फिल्म निर्देशकों की बात की जाए तो संजय लीला भंसाली का नाम सबसे पहले लिया जाता है.
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भंसाली की प्रतिभा के कायल तो दर्शक उनकी पहली फिल्म “खामोशी द म्यूजिकल” से हो ही चुके थे पर भंसाली को सफलता का स्वाद चखने का मौका मिला वर्ष 1999 में प्रदर्शित “हम दिल दे चुके सनम” से. फिल्म के कहानी मैत्रयी देवी के एक बंगाली उपन्यास पर आधारित थी.
कहानी के मोर्चे पर भंसाली का साथ दिया प्रदीप कारवट और केनेथ फिलिप्स ने और संवाद लिखे अमरीक गिल ने. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में थे सलमान खान, अजय देवगन, ऐश्वर्या रॉय, विक्रम गोखले, स्मिता जयकर, जोहरा सहगल, राजीव वर्मा, हेलन, रेखा राव, विनय पाठक, केनेथ देसाई और घनश्याम नायक.
इस्माईल दरबार ने फिल्म के लिए जादुई संगीत की रचना की. अपनी पहली ही फिल्म में दरबार ने इतना कर्णप्रिय संगीत दिया की आज तक भी फिल्म के गीत संगीत प्रेमियों के दिलो दिमाग पे छाये हुए हैं.
“आंखों की गुस्ताखियां”, “चांद छुपा बादल में”, “हम दिल दे चुके सनम”, “अलबेला सजन आयो रे”, “ढोली थारो ढोल बाजे”, “निम्बुडा निम्बुडा” और “अलबेला सजन” जैसे गीतों ने बहुत मकबूलियत हासिल की. इन खूबसूरत धुनों को शब्द दिए महबूब ने. फिल्म ने फिल्मफेयर पुरस्कारों में अपना डंका बजा दिया और कुल नौ पुरस्कार अपने नाम किये.
फिल्म के सेट्स, फिल्म का सिनेमेटोग्राफी, संगीत हर क्षेत्र में भंसाली की छाप साफ साफ देखने को मिलती है. सिनेमा के सिल्वरस्क्रीन पर फिल्म एक रुपहले सपने जैसे दिखती है और दर्शक चाहते हैं की यह सपना कभी न टूटे, अपने आप में एक सम्पूर्ण फिल्म.
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