गोविन्द निहलानी का नाम उन निर्देशकों में लिया जाता है जिन्हें हिंदी सिनेमा में समानांतर सिनेमा की शुरुआत करने का श्रेय जाता है.
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अस्सी के दशक में जब हिंदी फिल्म उद्योग दिशाहीन सा हो रहा था ऐसे में निहलानी ने “आक्रोश” के जरिये हिंदी सिनेमा में पदार्पण किया. वर्ष 1983 में प्रदर्शित हुई “अर्ध सत्य” उनकी दूसरी फिल्म थी. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कामयाबी पा कर फिल्म पंडितों को चौंका दिया. फिल्म की कहानी डी.वी.
पनवलकर की लघु कथा “सूर्या” पर आधारित थी. अनियंत्रित अपराध जगत और उसके सामने घुटने टेकती व्यवस्था की सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करती “अर्ध सत्य” की स्क्रिप्ट लिखी मराठी के प्रख्यात नाटककार विजय तेंदुलकर ने. संवाद लिखने में तेंदुलकर का साथ दिया वसंत देव ने.
निहलानी ने भ्रष्ट व्यवस्था और उसके प्रति उबल रहे आक्रोश को बेहद खूबसूरती से “अर्ध सत्य” में फिल्माया है. फिल्म में ओम पुरी, स्मिता पाटिल, नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी, सदाशिवराव अमरापुरकर, शफी इनामदार, अचुय्त पोतदार और इला अरुण ने मुख्य भूमिकाएं निभाई. फिल्म का संगीत दिया अजीत वर्मन ने. फिल्म में दिलीप चित्रे की कविताओं का प्रयोग किया गया.
“अर्ध सत्य” का निर्माण किया मनमोहन शेट्टी और प्रदीप उप्पोर ने. ओम पुरी को फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ. फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक समेत पांच फिल्मफेयर पुरस्कार भी अपने नाम किये. हिंदी फिल्म इतिहास की सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक “अर्ध सत्य” पुलिस विभाग पर आधारित अब तक की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है.
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