“ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, जरा हट के, जरा बच के, ये है बॉम्बे मेरी जान” आंखों में सपने और दिलों में अरमान लिए लाखों लोगों की एक ही मंजिल है, मुंबई - सपनो का शहर, भारत की आर्थिक राजधानी.
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भारत की फिल्म नगरी जिसे बॉलीवुड के नाम से भी जाना जाता है. इस मुंबई पर आतंक के सौदागरों की नापाक नजरें हमेशा से लगी रही है और यह शहर कई बार आतंकी हमलों का शिकार हुआ पर यहां के लोगों के जीवट के आगे आतंकी हमेशा ही हारे हैं.
वर्ष 2006 में मुंबई में लोकल ट्रेन्स में हुए सीरियल ब्लास्ट्स पर आधारित “मुंबई मेरी जान” मुंबई के उसी जज्बे को सलाम करती है. निर्देशक निशिकांत कामत ने अपनी पहली हिंदी फिल्म से ही समीक्षकों और दर्शकों को अपनी प्रतिभा का कायल बना दिया. यू टी. वी.
के रौनी स्क्रूवाला द्वारा निर्मित “मुंबई मेरी जान” रजत पट पर लिखी एक खूबसूरत कविता है. जिसे अदाकारों ने अपने संजीदा अभिनय से यादगार बना दिया है. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले लिखा योगेश विनायक जोशी और उपेन्द्र सिधाए ने. फिल्म का शीर्षक वर्ष 1956 में प्रदर्शित हुई फिल्म सी.आई.डी.
के मशहूर गीत “ये है बॉम्बे मेरी जान” से प्रेरित है.फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाई परेश रावल, इरफान खान, के.के. मेनन, आर. माधवन, सोहा अली खान, आनंद गोराडिया, विजय मौर्या और समीर बापट ने. फिल्म का संगीत दिया समीर फतारफेकर ने.
“मुंबई मेरी जान” कलाकारों के कमाल के अभिनय के लिए हमेशा याद रखी जायेगी, इरफान खान, परेश रावल और सोहा अली खान ने फिल्म में इतना हृदयस्पर्शी अभिनय किया है की हॉल से बाहर आने वाले हर दर्शक की आंखें नम हो जाती हैं. फिल्म को एक राष्ट्रीय और तीन फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त हुए.
वर्ष 2008 में प्रदर्शित हुई फिल्म हालांकि उतनी व्यावसायिक सफलता हासिल नहीं कर पायी पर अपने विषय और उसके प्रस्तुतिकरण के कारण फिल्म हमेशा सिने प्रेमियों को याद रहेगी.
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