दी ग्रेट शो मैन राज कपूर की इस फिल्म ने प्रेम को एक नयी परिभाषा प्रदान की.
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सिनेमा के रजतपट पर पहली बार किशोर प्रेम को अभिव्यक्ति देने वाली इस फिल्म ने अभिवावकों के लिए एक नया सरदर्द खड़ा कर दिया क्योंकि इस फिल्म के बाद घर छोड़ कर भागने वाले युवा प्रेमी जोड़ों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई.
मेरा नाम जोकर की असफलता के बाद राज कपूर वित्तीय संकट में थे और बॉबी के जरिये वो अपनी खोई हुई जमीन फिर से पाने की कोशिश में थे और इसके लिए उन्होंने ने नए चेहरों पर दांव खेला.
इस फिल्म से नायक बन परदे पर पहली बार अवतरित हुए ऋषि कपूर ( इससे पहले वो बाल कलाकार के रूप में मेरा नाम जोकर में काम कर चुके थे ) और उनका साथ निभाया डिम्पल कपाडिया ने.
प्राण, प्रेम नाथ, दुर्गा खोटे, सोनिया साहनी, अरुणा ईरानी, फरीदा जलाल और प्रेम चोपड़ा ( जिनके संवाद “प्रेम नाम है मेरा प्रेम चोपड़ा” ने उन्हें घर घर में मशहूर कर दिया ) ने फिल्म में महत्वपूर्ण किरदार निभाए. फिल्म के गीतों को लिखा था आनंद बक्षी, राजकवि इन्दरजीत सिंह तुलसी और विट्ठलभाई ने और संगीत दिया था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने.
फिल्म का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ. “मैं शायर तो नहीं”, “झूठ बोले कौवा काटे”, “हम तुम एक कमरे में बंद हो और चाबी खो जाए” और “अंखियों को रहने दे अंखियों के आस पास” जैसे गीतों ने हर संगीत रसिक का मन मोह लिया. शैलेंदर सिंह जिन्होंने ऋषि कपूर को अपनी आवाज दी थी रातों रात स्टार बन गए.
नरेंदर चंचल ने “बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो” गीत के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरुष गायक का फिल्मफेयर जीता. फिल्म ने सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (संयुक्त ) सहित कुल पांच फिल्मफेयर जीते. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी सफलता की इबारत लिखी और यह सन 1973 की सबसे कामयाब फिल्मों में से एक रही.
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