भारत के एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक युवराज सिंह को मध्यक्रम में सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की मौजूद्गी के कारण ज्यादा टेस्ट मैच खेलने का मौका नहीं मिला.
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इसके अलावा जब भी उन्हें अवसर मिला तब वह उसका अच्छी तरह से फायदा नहीं उठा पाये लेकिन वनडे में बायें हाथ के इस बल्लेबाज का कोई सानी नहीं. कई बार तो वह इतनी अच्छी तरह से गेंद को हिट करते हैं कि गेंदबाज यह सोच नहीं पाता कि आखिर युवराज को किस जगह गेंद की जाए.
उन्होंने 2007 में दक्षिण अफ्रीका में पहले ट्वेंटी-20 विश्वकप में इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्राड के एक ओवर में छह छक्के जमाये थे. भारत की 2011 की विश्व कप की खिताबी जीत में युवराज ने अहम भूमिका निभायी और उन्हें टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया. टेस्ट मैचों में हालांकि तेज गेंदबाजों के सामने उन्हें जूझना पड़ा.
यह अलग बात है कि लाहौर में 2004 में घसियाली पिच पर उन्होंने 112 रन की पारी खेली थी जबकि 2008 में इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई में लक्ष्य का पीछा करते हुए नाबाद 85 रन बनाये थे. युवराज ने 40 टेस्ट मैच में 1,900 रन बनाये. वनडे में उनका रिकार्ड ज्यादा आकर्षक है.
उन्होंने 304 एकदिवसीय मैचों में 8,701 रन बनाये. एकदिवसीय क्रिकेट में उन्होंने 14 शतक लगाये. 2012 की शुरुआत में पता चला कि युवराज को कैंसर है. इलाज के बाद उन्होंने उसी साल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की. जून 2019 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया.
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