बायें हाथ का बल्लेबाज विनोद कांबली तब केवल 17 साल का था जब उन्होंने 16 वर्षीय सचिन तेंदुलकर के साथ स्कूली मैच में 664 रन की रिकार्ड साझेदारी की थी.
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तेंदुलकर को पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला. कांबली को इंतजार करना पड़ा लेकिन उन्होंने अपनी स्ट्रोक कला से क्रिकेट प्रेमियों को सम्मोहित कर दिया. 18 जनवरी 1972 को मुंबई में जन्मे कांबली के लिये 1993 का वर्ष बेहद खास रहा. तब उन्होंने दो दोहरे शतक सहित टेस्ट मैचों में कुल चार शतक लगाये थे.
इंग्लैंड के खिलाफ अपने मुंबई में 224 रन और फिर जिम्बाब्वे के खिलाफ दिल्ली में 227 रन बनाकर उन्होंने भारतीय मध्यक्रम को मजबूती दी थी. ऐसा लगने लगा था कि भारत को मध्यक्रम में एक कुशल बल्लेबाज मिल गया है लेकिन अपनी स्वच्छंद जीवनशैली और अनुशासनहीनता के कारण उनका करियर लंबा नहीं खिंच पाया.
उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच 24 साल का होने से पहले ही 1995 में खेला था. एकदिवसीय क्रिकेट में कांबली ने नौ बार वापसी की लेकिन सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे खिलाडियों के आने के बाद उनके लिये भारतीय मध्यक्रम में जगह बनाना आसान नहीं रहा. कांबली को 2000 के बाद राष्ट्रीय टीम में नहीं चुना गया.
उन्होंने 2009 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और 2011 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट से संन्यास लिया. कांबली ने अपने करियर में 17 टेस्ट मैच में 1,084 रन बनाये जिसमें चार शतक शामिल हैं. उन्होंने 104 वनडे में दो शतक की मदद से 2477 रन बनाये.
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