अजय जडेजा यानि भारतीय क्रिकेट का ऐसा पहला खिलाड़ी जिसे आप एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का विशेषज्ञ कह सकते हैं.
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जडेजा बेहद ऊर्जावान, अपने खेल और व्यवहार से मैदान पर माहौल जीवंत बनाये रखने वाले खिलाड़ी थे. सीमित ओवरों की क्रिकेट में परिस्थितियों के अनुसार बल्लेबाजी करने में माहिर होने के अलावा विकेटों के बीच दौड़ और चपल क्षेत्ररक्षण के कारण भी उन्होंने भारतीय टीम में अपना खास स्थान बनाया था. वह कामचलाऊ गेंदबाजी भी करते थे.
अपने करियर में उन्होंने कई यादगार पारियां खेली जिनमें श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में 119 रन तथा आस्ट्रेलिया के खिलाफ कोच्चि में नाबाद 105 रन और ओवल में नाबाद 100 रन प्रमुख हैं. विश्व कप 1996 में पाकिस्तान के खिलाफ बेंगलूर में खेले गये क्वार्टर फाइनल में वकार युनुस के खिलाफ उनके आक्रामक तेवरों को भला कौन भूल सकता है.
तब जडेजा ने 25 गेंद पर 45 रन ठोक दिये थे. स्विंग और शार्ट पिच गेंदों के खिलाफ अपनी कमजोरी के कारण वह हालांकि केवल 15 टेस्ट मैच ही खेल पाये जिनमें उन्होंने 26.18 की औसत से 576 रन बनाये.
सट्टेबाजों के साथ तथाकथित संबंधों के कारण 2000 में भारतीय क्रिकेट को हिला देने वाले मैच फिक्सिंग प्रकरण के बाद जडेजा पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया गया. उन्होंने इसे चुनौती भी दी जिसके कारण उनकी प्रथम श्रेणी मैचों में वापसी भी हुई लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी नहीं कर पाये.
जडेजा ने अपने करियर में 196 एकदिवसीय मैच खेले जिनमें 37.47 की औसत से 5359 रन बनाये जिसमें छह शतक शामिल हैं. संन्यास के बाद वह क्रिकेट कमेंट्री और विशेषज्ञ की भूमिका में भी नजर आए.
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