भारत का पहला वास्तविक तेज गेंदबाज और आलराउंडर.
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एक बेहतरीन गेंदबाज, आक्रामक बल्लेबाज और चुस्त क्षेत्ररक्षक. कपिल एक समय टेस्ट क्रिकेट में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज थे. वह उस जमाने में क्रिकेट खेले थे जब इयान बाथम, इमरान खान और रिचर्ड हैडली तीन अन्य आलराउंडर खेला करते थे.
इन चारों में कौन सर्वश्रेष्ठ आलराउंडर है इस पर कभी एक राय नहीं बन पायी क्योंकि सभी अपने फन में माहिर थे. कपिल देव तो ऐसे क्रिकेटर थे जिन्होंने न सिर्फ भारतीय गेंदबाजी बल्कि भारतीय क्रिकेट को भी नयी दिशा दी थी.
कभी स्पिनरों पर निर्भर रहने वाले भारत ने कपिल के आगमन के बाद ही तेज गेंदबाजी के महत्व को समझा. वह कपिल ही थे जिनकी अगुवाई में भारत ने 1983 विश्व कप जीता और जिसके बाद इस देश में क्रिकेट को नयी पहचान मिली. कपिल की गेंदबाजी की खासियत उनकी एक्यूरेसी और गेंद को स्विंग कराना था.
उन्होंने 1975-76 में हरियाणा की तरफ से पंजाब के खिलाफ रणजी ट्राफी मैच में पदार्पण किया था और पहली पारी में ही 39 रन देकर छह विकेट लिये थे.
इसके एक साल बाद उन्होंने बंगाल के खिलाफ 20 रन देकर सात विकेट और सेना के खिलाफ 38 रन देकर आठ विकेट लिये जिसके बाद उन्हें पाकिस्तान दौरे पर जाने वाली टीम में चुन लिया गया.
पाकिस्तान के खिलाफ वह तीन टेस्ट में सात विकेट ही ले पाये लेकिन वेस्टइंडीज के खिलाफ छह टेस्ट में 17 विकेट लेकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की. इसके बाद तो वह लगभग डेढ़ दशक तक भारतीय गेंदबाजी के अगुआ की भूमिका बखूबी निभाते रहे. उन्होंने देश और विदेश में अपनी प्रभावशाली गेंदबाजी से बल्लेबाजों को खासा परेशान किया.
इस दौरान पूरी तरह से भारतीय गेंदबाजी का भार उनके कंधों पर रहा. उनका औसत या स्ट्राइक रेट बाथम, इमरान या हैडली से बेहतर नहीं रहा लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि कपिल ने अपनी अधिकतर गेंदबाजी भारत की बेजान पिचों पर की. तब भारत में पिचें पूरी तरह से स्पिनरों के माफिक बनायी जाती थी.
इसके अलावा उन्हें कभी दूसरे छोर से अच्छा सहयोग नहीं मिला जिसके कारण विपक्षी बल्लेबाज दबाव हटाने में सफल रहते थे. छह जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में जन्मे हरियाणा हरिकेन के नाम से भी मशहूर कपिल ने 131 टेस्ट मैच में 29.64 की औसत से 434 विकेट लिये.
उन्होंने 23 बार पारी में पांच या इससे अधिक विकेट तथा दो बार मैच में दस या इससे अधिक विकेट लिये. टेस्ट मैचों में उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 83 रन देकर नौ विकेट था जो उन्होंने वेस्टइंडीज के खिलाफ 1983-84 में अहमदाबाद में किया था. कपिल ने 225 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में 27.45 की औसत से 253 विकेट हासिल किये.
प्रथम श्रेणी मैचों में उनके नाम पर कुल 835 विकेट दर्ज हैं. उन्होंने 1994 में रिचर्ड हैडली का सर्वाधिक टेस्ट विकेट का तत्कालीन रिकार्ड तोड़ने के बाद टेस्ट क्रिकेट और उसी साल अक्तूबर में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था.
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1983 विश्व कप जीतते समय भारत के कप्तान कौन थे?
