भारत में कपिल देव का करियर जब अवसान पर था तब जवागल श्रीनाथ के रूप में टीम को नया गेंदबाज मिला था.
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जब उन्होंने शुरुआत की तो तब भारत के पास कपिल और मनोज प्रभाकर जैसे गेंदबाज थे जिनका मुख्य हथियार स्विंग गेंदबाजी थी लेकिन श्रीनाथ ने अपनी तेजी से चयनकर्ताआें को प्रभावित किया. उन्होंने ऐसी पिचों पर उछाल हासिल करने की कोशिश की जिनमें गेंद नीचे रहती थी.
श्रीनाथ ने हैदराबाद के खिलाफ अपने पहले प्रथम श्रेणी मैच में ही हैट्रिक बनायी थी. उन्होंने पहले दो सत्र मे क्रमश: 25 और 20 विकेट लिये जिसके बाद उन्हें आस्ट्रेलिया दौरे के लिये भारतीय टीम में शामिल किया गया.
कपिल और प्रभाकर के संन्यास लेने के बाद उन्होंने अपने राज्य के ही वेंकटेश प्रसाद के साथ जोड़ी बनाकर लगभग छह सात साल तक भारतीय गेंदबाजी की अगुवाई की. वह शुरू में इनकटर और इनस्विंगर पर निर्भर थे लेकिन बाद में उन्होंने लेग कटर और धीमी गेंद का भी बखूबी इस्तेमाल किया.
वह कभी हार नहीं मानने वाले गेंदबाज थे जिन्होंने दबाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया. श्रीनाथ ने 1996 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अहमदाबाद में मैच की चौथी पारी में 21 रन देकर छह विकेट लिये और भारत को जीत दिलायी. उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हालांकि 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ कोलकाता में किया था.
तब उन्होंने दूसरी पारी में 86 रन देकर आठ विकेट लिये थे. उस मैच में श्रीनाथ ने 13 विकेट चटकाये थे. बाद के वर्षों में श्रीनाथ ने भारतीय युवा गेंदबाजों के मेंटोर की भूमिका भी बखूबी निभायी. श्रीनाथ का जन्म 31 अगस्त 1969 को मैसूर में हुआ था.
उन्होंने 67 टेस्ट मैच में 30.49 की औसत से 236 विकेट और 229 एकदिवसीय मैच में 28.08 की औसत से 315 विकेट लिये. उन्होंने 2003 के विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था.
