भारत के सबसे सफल आफ स्पिनर जो गेंद को बहुत अधिक फ्लाइट नहीं देने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खासे सफल रहे.
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पंजाब के जालंधर में तीन जुलाई 1980 को जन्मे हरभजन ने केवल 17 साल की उम्र में भारतीय टीम में पदार्पण किया तथा अपनी गेंदबाजी और बल्लेबाजों पर हावी होने के रवैये के कारण जल्द ही टीम का अहम हिस्सा बन गये.
हरभजन के गेंदबाजी एक्शन पर भी सवाल उठाये गये लेकिन वह कभी घबराये नहीं और लड़ाकू योद्धा की तरह मैदान पर डटे रहे. आस्ट्रेलियाई टीम 2001 में जब भारतीय दौरे पर आयी जो हरभजन के करियर के लिये महत्वपूर्ण साबित हुई.
उन्होंने इस श्रृंखला के तीन मैच में 32 विकेट लिये जिनमें कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गये ऐतिहासिक मैच की हैट्रिक भी शामिल है. वह टेस्ट क्रिकेट में ऐसा कारनामा करने वाले पहले भारतीय गेंदबाज बने थे.
वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन टेस्ट मैच में उन्होंने तीन मैच में 20 विकेट और आस्ट्रेलिया के खिलाफ 2004 में घरेलू सरजमीं पर तीन मैच में 21 विकेट लिये. आस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जिसके कारण उन्हें 'टर्बनेटर’ नाम भी मिला लेकिन इसी टीम के खिलाफ अपनी प्रतिद्वंद्विता के कारण उन्हें कुछ विषम पलों से भी गुजरना पड़ा.
भारतीय टीम 2007-08 में जब आस्ट्रेलिया दौरे र गयी थी तो सिडनी टेस्ट मैच में वह एंड्रयू साइमंड्स पर कथित नस्ली टिप्पणी करने के लिये विवादों में फंस गये थे. आईपीएल के पहले सत्र में ही एस श्रीसंत को थप्पड़ मारने के कारण वह इंडियन प्रीमियर लीग के पहले सत्र के बाकी मैचों में नहीं खेल पाये थे.
अनिल कुंबले के संन्यास लेने के बाद भारतीय स्पिन विभाग का जिम्मा अकेले उनके कंधों पर आ गया लेकिन वह लंबे समय तक इसे बखूबी नहीं निभा पाये और फार्म खराब होने के कारण उन्हें 2011 में टीम से बाहर कर दिया गया. इस बीच हालांकि बल्लेबाजी में उन्होंने कुछ अच्छा प्रदर्शन किया तथा दो टेस्ट शतक जमाये.
हरभजन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 103 टेस्ट मैच में 417 विकेट और 236 एकदिवसीय मैच में 269 विकेट लिये. दिसंबर 2021 में उन्होंने क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया.
