भारत को सबसे अधिक मैच जिताने में अहम भूमिका निभाने वाला लेग स्पिनर अनिल कुंबले गेंद को बहुत टर्न नहीं कराते थे लेकिन उनकी गुगली, टाप स्पिन, फ्लिपर और लेग ब्रेक को समझना किसी भी बल्लेबाज के लिये आसान काम नहीं था.
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वह बल्लेबाज को शाट मारने के लिये पर्याप्त समय या जगह नहीं देते थे. उन्होंने 1990 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया लेकिन इंग्लैंड के इस दौरे से लौटने के बाद वह ज्यादा सफल नहीं रहे और उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया . इस समय का सदुपयोग कुंबले ने इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करके किया.
उन्हें 1992 में ईरानी ट्राफी के लिये शेष भारत की टीम में जगह मिल गयी. उन्होंने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर खेले गये मैच में 13 विकेट लिये जिसके कारण उन्हें दक्षिण अफ्रीका दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम में जगह मिल गयी.
इसके बाद 17 अक्तूबर 1970 को बेंगलूर में जन्मे कुंबले ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर तो भारतीय गेंदबाजी उनके इर्द गिर्द ही घूमने लगी.
कुंबले ने अपने करियर में कई चमत्कारिक प्रदर्शन किये लेकिन 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली में उनके प्रदर्शन को भला कौन भुला सकता है जब उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ एक पारी में सभी दस विकेट चटका उन्होंने जिम लेकर के वर्षों पुराने रिकार्ड की बराबरी की थी.
दिसंबर 2001 में उन्होंने बेंगलूर के अपने घरेलू मैदान पर 300वां टेस्ट विकेट लिया. ऐसेसा कारनामा करने वाले वह भारत के पहले स्पिनर थे. एक साल बाद उन्होंने एकदिवसीय मैचों में भी यह उपलब्धि हासिल की. कुंबले ने जनवरी 2008 में 600वां टेस्ट विकेट लेकर भारतीय क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ा था.
कुंबले असल में फाइटर थे जिन्होंने समय समय पर अपनी काबिलियत साबित की. वेस्टइंडीज के खिलाफ एंटीगा में 2002 में खेले गये उस टेस्ट को कौन भूल सकता है जब जबड़ा टूटने के बावजूद क्रीज पर उतरे थे. जब 2003- 04 में उनका करियर समाप्त माना जाने लगा था तब उन्होंने आस्ट्रेलियाई दौरे में बेहतरीन प्रदर्शन किया.
उन्होंने खेल के 17वें और 118वें मैच में अपना पहला टेस्ट शतक भी जमाया था. बेहद शालीन और बुद्धिमान क्रिकेटर होने के बावजूद कुंबले को 37 वर्ष की उम्र में भारत की कप्तानी का मौका मिला था. उनकी कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ घरेलू श्रृंखला जीती.
इसके बाद उन्हीं की अगुवाई में भारत ने 2007-08 में आस्ट्रेलियाई दौरा किया था जिसमें सिडनी में 'मंकीगेट’ कांड को सुलझाने में उनकी भूमिका भी अहम रही. कुंबले ने 2008 के आखिर में ही आस्ट्रेलिया दौरे के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था.
उन्होंने अपने करियर में 132 टेस्ट मैच में 2506 रन बनाये तथा 29.65 की औसत से 619 विकेट लिये. कुम्बले ने 35 बार पारी में पांच या इससे अधिक विकेट तथा मैच में आठ बार दस या इससे अधिक विकेट लिये. उनके नाम पर 271 एकदिवसीय मैचों में 337 विकेट दर्ज हैं.
