सचिन तेंदुलकर यानि क्रिकेट का पर्याय.
विस्तार
ऐसा बल्लेबाज जिन्हें संपूर्णता के काफी करीब रखा जा सकता है. यह कहा जा सकता है कि केवल डान ब्रैडमैन ही उनकी श्रेष्ठता की बराबरी कर सकते हैं. रिकार्डों के मामले में तो वह ब्रैडमैन से भी मीलों आगे निकल गये.
टेस्ट और एकदिवसीय मैचों में सर्वाधिक रन और सर्वाधिक शतक के अलावा कई ऐसे रिकार्ड तेंदुलकर के नाम पर दर्ज हैं जिन तक पहुंचना किसी भी बल्लेबाज के लिये नामुमकिन लगता है.
जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत हुई थी तो तब किसी ने नहीं सोचा था कि कोई बल्लेबाज इसमें शतकों का शतक पूरा करेगा लेकिन 24 अप्रैल 1973 को मुंबई में जन्मे तेंदुलकर 16 मार्च 2012 को बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर में यह मुकाम हासिल किया.
उनके नाम पर 200 टेस्ट मैचों में 15,921 रन और 463 एकदिवसीय मैचों में 18,426 रन दर्ज हैं. टेस्ट मैचों में उन्होंने 51 और एकदिवसीय मैचों में 49 शतक बनाये. उनकी बल्लेबाजी की विशेषता संतुलन, मूवमेंट और कई तरह के स्ट्रोक हैं.
क्रिकेट का शायद ही कोई ऐसा स्ट्रोक होगा जो तेंदुलकर के बल्ले से नहीं निकला हो लेकिन स्ट्रेट ड्राइव उनका सबसे प्रिय स्ट्रोक है. दुनिया के दिग्गज लेग स्पिनर शेन वार्न तथा कई अन्य स्पिनरों ने उन पर लेग स्टंप पर गेंदबाजी करने की रणनीति अपनायी तो तेंदुलकर ने उनका तोड़ पैडल स्वीप के रूप में निकाला.
उनकी बल्लेबाजी में कोई कमजोरी नहीं है. उन्होंने हर तरह के विकेट, हर तरह की परिस्थित और दुनिया के लगभग हर मैदान अपनी बल्लेबाजी का जलवा दिखाया है. केवल 16 साल 205 दिन में टेस्ट कैरियर का आगाज करने वाले तेंदुलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन आस्ट्रेलिया के खिलाफ किया है.
जब वह केवल 19 साल के थे तब उन्होंने पर्थ की वाका पिच पर 114 रन की साहसिक पारी खेली थी जिसे वह आज भी अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी आंकते हैं. जब वह 25 साल के थे तब तक उनके नाम पर 25 शतक दर्ज थे.
वर्ष 2000 में वह 50 अंतरराष्ट्रीय शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने, वह 2008 में ब्रायन लारा को पीछे छोड़कर सर्वाधिक टेस्ट रन बनाने वाले बल्लेबाज बने. इसके एक साल बाद उन्होंने 30 हजार टेस्ट रन पूरे किये और 2010 में वह 50 टेस्ट शतक बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने.
उन्होंने छह विश्व कप में भाग लिया और 2011 में उनका विश्व चैंपियन टीम का हिस्सा बनने का सपना पूरा हुआ. वह एकदिवसीय मैचों में दोहरा शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज हैं. उन्होंने 2010 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ग्वालियर में नाबाद 200 रन की पारी खेली थी.
नवंबर 2013 में अपने 200वें टेस्ट के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया. 2014 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया.
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