राहुल द्रविड़ यानि एकाग्रता की प्रतिमूर्ति या यूं कहें कि टेस्ट बल्लेबाजी के पारंपरिक स्वरूप को आगे बढ़ाने वाला ऐसा क्रिकेटर जिन्होंने रक्षात्मक बल्लेबाजी की ऐसी मिसाल पेश की कि उन्हें “द वाल” या “भारतीय दीवार” और “श्रीमान भरोसेमंद” जैसे विशेषण दिये गये.
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किसी भी तरह का विकेट हो द्रविड़ की कड़ी मेहनत, तकनीक और एकाग्रता के सामने कोई मायने नहीं रखते. यदि आस्ट्रेलिया के 2011-12 के दौरे को छोड़ दिया जाए तो द्रविड़ रूपी दीवार हमेशा दुनिया भर के गेंदबाजों के लिये अबूझ पहेली बनी रही.
आस्ट्रेेलिया के खिलाफ 2003 में उन्होंने एडिलेड में दो पारियों में 835 मिनट क्रीज पर बिताये और फिर पाकिस्तान के खिलाफ 12 घंटे से अधिक समय क्रीज पर बिताकर 270 रन बनाये. यदि उन्होंने आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की तेज पिचों पर रन बटोरे तो पाकिस्तान और वेस्टइंडीज में भी उन्हें अच्छी खासी सफलता मिली.
द्रविड़ ने घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाने के बाद 1996 में भारतीय टीम में जगह बनायी और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने 164 टेस्ट मैच में 52.31 की औसत से 13,288 रन बनाये जिसमें 36 शतक शामिल हैं. इसके अलावा 344 एकदिवसीय मैचों में उनके नाम पर 10,889 रन दर्ज हैं.
उन्होंने हमेशा टीम की जरूरतों को प्राथमिकता में रखा और यही वजह रही कि जब एकदिवसीय मैचों में संतुलन बनाने के लिये उन्हें विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी तो उन्होंने उसे सहर्ष स्वीकार किया. स्लिप में उनके क्षेत्ररक्षण का भी कोई सानी नहीं है. टेस्ट मैचों में रिकार्ड 210 कैच इसका सबूत हैं.
इस दिग्गज बल्लेबाज का जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर में हुआ लेकिन वह बेंगलूर में पले बढ़े. मार्च 2012 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया. बाद में वह भारतीय टीम के मुख्य कोच भी रहे.
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