हैदराबाद ने भारतीय क्रिकेट को कुछ बेहतरीन कलात्मक बल्लेबाज दिये और वीवीएस लक्ष्मण उनमें एक हैं.
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जब वह अपनी पूरी लय में होते हैं तो उनकी बल्लेबाजी परम आनंद की अनुभूति कराती है. वह अपनी कलाईयों के सहारे गेंद को जिस महीनता से आन साइड पर मोड़ते हैं उसका कोई जवाब नहीं. कई बार तो स्ट्रोकप्ले में वह सचिन तेंदुलकर से भी आगे निकल जाते हैं.
एक नवंबर 1974 को हैदराबाद में जन्मे लक्ष्मण के माता पिता चिकित्सक थे और दायें हाथ का यह बल्लेबाज भी एक समय मेडिकल का ही छात्र था.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका शुरुआती दौर उतार चढ़ाव वाला रहा लेकिन मार्च 2001 में कोलकाता में उन्होंने आस्ट्रेलिया के खिलाफ 281 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर टेस्ट क्रिकेट में नया अध्याय जोड़ दिया था. भारतीय टीम उनकी इस पारी की वजह से फालोआन के बावजूद जीत दर्ज करने में सफल रहा था. इसके बाद आस्ट्रेलियाई हमेशा उनके निशाने पर रहे.
दुनिया भर के बल्लेबाजों को अपनी विविधतापूर्ण गेंदबाजी से अपने इशारों पर नचाने वाले आस्ट्रेलियाई गेंदबाज 2011-12 के दौरे से पहले तक यह पता नहीं लगा पाये थे कि आखिर लक्ष्मण को कहां और कैसी गेंदबाजी की जाए. यही वजह है कि आस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान इयान चैपल ने उन्हें “वेरी वेरी स्पेशल” का उपनाम दे दिया था.
लक्ष्मण हमेशा टीम के लिये तारणहार बने रहे. वह हमेशा एक जैसा प्रदर्शन नहीं कर पाये और इसलिए कहा जा सकता है कि वह कभी अपना कैरियर बचाने, कभी टीम को फालोआन या हार से बचाने या कभी लक्ष्य का पीछा करने के लिये खेलते रहे.
यह सवाल हमेशा बना रहा कि आखिर उन्हें कभी विश्व कप खेलने का मौका क्यों नहीं मिला. आखिर जिस बल्लेबाज ने 134 टेस्ट मैच में 8781 रन बनाये, उसे केवल 86 वनडे खेलने का मौका क्यों मिला. अगस्त 2012 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिया.
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