रवि शास्त्री को 19 साल की उम्र में जब 1981 में अचानक न्यूजीलैंड दौरे पर भेजा गया तो तब वह बायें हाथ के स्पिनर हुआ करते थे.
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शास्त्री आखिर तक बायें हाथ से स्पिन गेंदबाजी करते रहे लेकिन बाद में उन्होंने खुद को दायें हाथ का कुशल बल्लेबाज भी साबित किया. कई बार पारी का आगाज करने वाले शास्त्री को आप विस्फोटक बल्लेबाज और गेंद को रोकने वाला बोरिंग बल्लेबाज कुछ भी कह सकते हैं.
एक आेवर में छह छक्के जड़ने वाले शास्त्री दुनिया के केवल दूसरे बल्लेबाज थे तो कई बार उन्होंने कुछ रनों के लिये घंटों क्रीज पर बिताये. मुंबई में 27 मई 1962 को जन्मे शास्त्री ने अपने कैरियर में 80 टेस्ट मैच में 35.79 की औसत से 3830 रन बनाये जिसमें 11 शतक शामिल हैं.
उन्होंने 1992 में सिडनी में आस्ट्रेलिया के खिलाफ 206 रन की जोरदार पारी खेली थी. यह शेन वार्न का पहला टेस्ट मैच भी था. इससे पहले उन्होंने 1990 में इंग्लैंड के खिलाफ आेवल में 187 रन बनाये थे जबकि वेस्टइंडीज के दो दौरों में उसके तेज गेंदबाजों का डटकर सामना करके शतकीय पारियां खेली थी.
शास्त्री ने एकदिवसीय मैचों में भी अपनी बल्लेबाजी का कमाल दिखाया था. उन्होंने 1985 में विश्व चैंपियनशिप में ‘चैंपियन्स और चैंपियन्स’ चुना गया था जिसके लिये उन्हें आडी कार दी गयी थी. शास्त्री ने 150 एकदिवसीय मैचों में 3108 रन बनाये जिसमें चार शतक और 18 अर्धशतक शामिल हैं. वह अब कमेंटेटर की भूमिका निभा रहे हैं.
वह 2017 से 2021 तक भारतीय टीम के मुख्य कोच रहे.
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