अपने करारे शाट से गेंदबाजों विशेषकर स्पिनरों पर हावी रहने वाले दायें हाथ के सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू ने तब भारत की ओपनिंग की समस्या को तब दूर करने की कोशिश की थी जबकि सुनील गावस्कर के संन्यास लेने के बाद भारत एक अदद सलामी जोड़ी की तलाश में जुटा था.
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उन्होंने अपने टेस्ट कैरियर की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ 1983 में अहमदाबाद में की थी और 1987 के विश्व कप में लगातार चार मैच अर्धशतक जमाये थे.
बीस अक्तूबर 1963 को पटियाला में जन्मे सिद्धू ने 1988 में वेस्टइंडीज के खिलाफ किंग्सटन में 116 रन बनाये और फिर कुछ महीनों बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ बेंगलूर में भी 116 रन की पारी खेली थी. सिद्धू ने अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी (201 रन) वेस्टइंडीज के खिलाफ 1997 में पोर्ट आफ स्पेन में खेली थी.
उन्होंने 1993 में श्रीलंका के खिलाफ कानपुर में 124 रन की पारी के दौरान आठ छक्के लगाये थे जबकि 1997-98 में आस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच पारियों में चार अर्धशतक लगाये थे. सिद्धू ने अपने कैरियर में 51 टेस्ट मैच खेले जिसमें 42.13 की औसत से 3202 रन बनाये. उन्होंने नौ शतक और 15 अर्धशतक भी लगाये.
उनके नाम पर 136 एकदिवसीय मैच में 4413 रन दर्ज हैं. सिद्धू को बाद में अपनी खास तरह की कमेंट्री के लिये याद किया जाने लगा. वह राजनीति में भी सक्रिय रहे और लोकसभा सांसद भी चुने गए.टेलीविजन पर हास्य कार्यक्रम ‘ग्रेट इंडियन लाफ्टर शो’ आदि में जज की भूमिका भी उन्होंने निभाई.
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