भारतीय क्रिकेट के “टाइगर” यानी मंसूर अली खां पटौदी को देश के सबसे सफल कप्तानों में गिना जाता है.
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अपने कैरियर के शुरुआती दौर में ही एक आंख गंवाने के बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई साहसिक पारियां खेली. पांच जनवरी 1941 को भोपाल में जन्मे टाइगर पटौदी के पिता इफ्तिखार अली खां पटौदी इंग्लैंड और भारत की तरफ टेस्ट क्रिकेट खेल चुके थे.
टाइगर का जन्म भले नबाव खानदान में हुआ था लेकिन उन्हें हमेशा विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था. जब वह केवल 11 साल के थे तब उनके जन्मदिन पर उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद कैरियर के शुरू में कार दुर्घटना में उनकी एक आंख की रोशनी चली गयी थी.
पटौदी अपने अधिकतर रन लेग साइड में बटोरते थे जब गेंद को हवा में खेलने से भी परहेज नहीं करते थे. इंग्लैंड के खिलाफ 1967 में लीड्स में खेली गयी उनकी 148 रन की पारी को क्रिकेट की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक आंका जाता है.
उन्होंने इससे पहले दिल्ली में 1964 में इंग्लैंड के खिलाफ ही नाबाद 203 रन बनाये जबकि एक साल बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ 153 रन की पारी खेली थी. आंख में चोट लगने के बावजूद उन्होंने जल्द ही क्रिकेट में वापसी करके इंग्लैंड के खिलाफ 1962 में चेन्नई में 103 रन बनाकर भारत की जीत में अहम भूमिका निभायी थी.
जब वह केवल 21 साल के थे तब उन्हें भारतीय टीम की कमान संभालनी पड़ी थी. पटौदी ने कुल 46 टेस्ट मैच खेले जिनमें से 40 में उन्होंने टीम की कमान संभाली और नौ में भारत को जीत दिलायी. उनकी अगुवाई में ही भारत ने विदेशों में पहला टेस्ट मैच और पहली श्रृंखला जीती थी.
पटौदी ने 46 टेस्ट मैच में 34.91 की औसत और छह शतक की मदद से 2793 रन बनाये. उनका 22 सितंबर 2011 को 70 साल की उम्र में दिल्ली में संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया था.
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