भारत की तरफ से टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहला शतक जड़ने वाले लाला अमरनाथ के छोटे बेटे मोहिंदर अमरनाथ का कैरियर उतार चढ़ाव वाला रहा.
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उन्होंने 1969 में टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया लेकिन लगभग दो दशक तक क्रिकेट में बने रहने के बावजूद वह 69 टेस्ट मैच ही खेल पाये. इस बीच हालांकि उन्होंने भारतीय खिलाडियों को कभी हार नहीं मानने का जज्बा सिखाया. वह लगातार टीम से अंदर बाहर होते रहे और इसलिए उन्हें वापसी करने का बादशाह भी कहा जाता है.
वह उन कुछेक बल्लेबाजों में शामिल हैं जिन्हें वेस्टइंडीज के खौफनाक तेज गेंदबाजों के सामने सफलता मिली. उनके ड्राइव और पूरे साहस के साथ किये गये हुक का कोई जवाब नहीं था. उनके लिये 1982-83 का सत्र सबसे अच्छा रहा.
तीन साल बाद टीम में वापसी करने के बाद उन्होंने वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के खिलाफ उनकी सरजमीं पर खेले गये 11 टेस्ट मैच में पांच शतक लगाये थे. भारत की 1983 की विश्व कप की जीत में भी उन्होंने अहम योगदान दिया था. उन्हें सेमीफाइनल और फाइनल में मैन आफ द मैच चुना गया था.
उन्होंने हमेशा मजबूत टीमों के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन किया और अपने 11 में से नौ शतक विदेशी धरती पर लगाये. अमरनाथ का जन्म 24 सितंबर 1950 को पटियाला में हुआ था. उन्होंने 69 टेस्ट मैच की 113 पारियों में 42.50 की औसत से 4378 रन बनाये.
इसके अलावा 85 एकदिवसीय मैच में उनके नाम पर 30.53 की औसत से 1924 रन दर्ज हैं. वह मध्यम गति के गेंदबाज भी थे और अनुकूल परिस्थितियों में गेंद को हवा में मूव करा देते थे. उन्होंने टेस्ट मैचों में 32 और वनडे में 46 विकेट लिये.
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