कोई भी क्रिकेटर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह की स्वर्णिम शुरुआत का सपना देखता है जैसी कि मोहम्मद अजहरूद्दीन ने की थी.
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उन्होंने 1984-85 में कोलकाता में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया और 110 रन बनाये. चेन्नई में अगले टेस्ट मैच में अजहरूद्दीन ने 105 रन जबकि कानपुर में 122 रन की पारियां खेली. मतलब पहले तीन टेस्ट मैच में तीन शतक का अद्भुत रिकार्ड.
अजहरूद्दीन के अलावा आज तक कोई भी अन्य क्रिकेटर ऐसा कारनामा नहीं कर पाया है. दायें हाथ के इस कलात्मक बल्लेबाज आठ फरवरी 1963 को हैदराबाद में हुआ था. वह मैदान के दोनों तरफ पूरे अधिकार से शाट लगाते थे लेकिन लेग साइड पर कलाईयों के सहारे किये गये फ्लिक का कोई जवाब नहीं था.
भारत के सबसे चुस्त क्षेत्ररक्षकों में भी अजहर की गिनती होती है. चाहे वह कवर पर हों या स्लिप में हर जगह पर उन्होंने अपने क्षेत्ररक्षण की छाप छोड़ी. कप्तान के रूप में अजहर को सफलता दर सफलता मिली. उन्होंने 47 टेस्ट मैच में भारतीय टीम की कप्तानी की जिसमें से 14 में उसे जीत मिली.
इसके अलावा वह जिन 174 वनडे में टीम के कप्तान रहे उनमें से 90 मैच में भारत जीत दर्ज करने में सफल रहा. अजहर ने अपने कैरियर में कुल 99 टेस्ट मैच में 45.03 की औसत और 22 शतक की मदद से 6215 रन तथा 334 एकदिवसीय मैचों में 36.92 की औसत 9378 रन बनाये.
मैच फिक्सिंग के आरोपों के कारण हालांकि भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने 2000 में उन पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था जिससे उनका कैरियर भी समाप्त हो गया. अजहरूद्दीन ने 2009 में कांग्रेस के टिकट पर संसद पहुंचकर राजनीति के रूप में नयी पारी की शुरुआत की है.
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