टेस्ट मैचों में भारत के सभी प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ शतक जड़ने वाले पहले भारतीय गुंडप्पा विश्वनाथ ने अपने टेस्ट कैरियर की बड़ी रोचक शुरुआत की थी.
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आस्ट्रेलिया के खिलाफ कानपुर में वह पहली पारी में शून्य पर आउट हो गये लेकिन दूसरी पारी में उन्होंने 137 रन की लाजवाब पारी खेली. इसके बाद तो विश्वनाथ भारतीय मध्यक्रम की रीढ़ बन गये. दायें हाथ के बल्लेबाज विश्वनाथ ने कुल 91 टेस्ट मैच खेले और इनमें से 87 टेस्ट मैच उन्होंने लगातार खेले थे.
उन्हें आप बल्लेबाजी का कलाकार कह सकते हैं जो तेज और स्पिन गेंदबाजी को पूरे अधिकार से खेलते थे. मजबूत कलाई के सहारे खेला गया उनका लेट कट दर्शनीय होता था. गावस्कर की तरह वह भी पांच फुट चार इंच के थे और उन्हीं की तरह गेंद की लेंथ का अनुमान, फुटवर्क, टाइमिंग और संतुलन गजब का था.
उन्होंने कई यादगार पारियां खेली जिनमें 1974-75 में वेस्टइंडीज के तूफानी तेज गेंदबाजों के सामने चेन्नई बनाये गये 97 रन, 1978.79 में इसी टीम के खिलाफ इसी मैदान पर बनाये गये 255 रन, क्राइस्टचर्च में न्यूजीलैंड के खिलाफ 1975-76 में 83 और 79 रन की पारियां आदि शामिल हैं.
विशी के नाम से मशहूर विश्वनाथ का जन्म 12 फरवरी 1949 को मैसूर में हुआ. उन्होंने भारत की तरफ से 91 टेस्ट मैच में 41.93 की औसत से 6080 रन बनाये जिसमें 14 शतक शामिल हैं. वह सच्ची खेल भावना से क्रिकेट खेला करते थे.
उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 1979-80 में अंपायर का गलत फैसला बदलकर बाब टेलर को वापस बल्लेबाजी के लिये बुलाया था. वह केवल इसी मैच में कप्तानी कर पाये थे लेकिन विशी को इससे फर्क नहीं पड़ा. उनके लिये खेल भावना सर्वोपरि थी.
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