नक्सलवाद की पृष्ठभूमि पर लिखित प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी के बंगाली उपन्यास पर आधारित निर्देशक गोविन्द निहलानी की फिल्म “हजार चौरासी की मां” वर्ष 1998 में प्रदर्शित हुई.
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फिल्म का निर्माण गोविन्द निहलानी ने मनमोहन शेट्टी के साथ मिलकर किया. फिल्म की कहानी महाश्वेता देवी की थी और स्क्रीनप्ले लिखा खुद निहलानी ने. फिल्म के संवादों का जिम्मा उठाया त्रिपुरारी शर्मा ने. फिल्म को व्यावसायिक सफलता तो नहीं मिली पर समीक्षकों ने फिल्म को बेहद पसंद किया. फिल्म को सर्वश्रष्ठ हिंदी फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त हुआ.
“हजार चौरासी की मां”, कलाकारों के उम्दा अभिनय, शानदार निर्देशन और एक बेहद सशक्त पटकथा के चलते एक बेहतरीन फिल्म बन पड़ी है.
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