दुनिया के सबसे लोकप्रिय क्रिकेटरों में से एक बिशन सिंह बेदी ने लगभग 12 साल तक भारतीय गेंदबाजी का जिम्मा संभाला.
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यह बेहद कलात्मक बायें हाथ का स्पिनर अपनी पीढ़ी के बल्लेबाजों के लिये हमेशा अबूझ पहेली बना रहा. वह गेंद को जितना संभव हो उतनी ऊंचाई से छोड़ते थे और उनका नियंत्रण गजब का था. वह स्पिनर की हर कला जानते थे. चाहे वह तेजी में बदलाव हो या वैरीएशन.
उनकी फ्लाइट, आर्म बाल, आफ ब्रेक और अचानक से तेज गेंद पर बल्लेबाज चकमा खा बैठते थे. उन्होंने 15 साल की उम्र में उत्तरी पंजाब की तरफ से 1961- 62 में रणजी ट्राफी में पदार्पण किया और बाद में दिल्ली की तरफ खेले. विकेट निकालने में वह माहिर थे और इसलिए कभी उनका तीर खाली नहीं जाता था.
एक समय नार्थम्पटनशर को उन्होंने खासी सफलता दिलायी जबकि 22 मैच में भारत के कप्तान भी रहे जिनमें से छह में भारतीय टीम ने जीत दर्ज की. अपनी बेबाक टिप्पणियों के कारण वह जब तब विवादों में भी फंसते रहे.
वह 1976- 77 में इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जान लीवर के वैसलीन का उपयोग करने पर आपत्ति जताने और 1976 में वेस्टइंडीज की खौफनाक गेंदबाजी के कारण किंग्सटन में भारत की दूसरी पारी समाप्त घोषित करने के कारण भी चर्चा में रहे थे. 25 सितंबर 1946 को अमृतसर में जन्मे बेदी बाद में भारतीय टीम के कोच भी रहे.
उन्होंने 1966 से 1979 तक अपने करियर में 67 टेस्ट मैच खेले जिनमें 28.71 की औसत से 266 विकेट लिये. प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बेदी के नाम पर 1560 विकेट दर्ज हैं. 23 अक्तूबर 2023 को उनका निधन हो गया.
