नाना पाटेकर (1951-2026) हिंदी और मराठी सिनेमा के प्रख्यात अभिनेता, लेखक और निर्देशक थे, जिनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था. भारी आवाज, तीखी संवाद अदायगी और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता उनकी पहचान रही.
विस्तार
उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ. मुंबई के सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ अप्लाइड आर्ट से पढ़ाई के बाद वह रंगमंच से जुड़े और “गमन” (1978) से फिल्मों में आए.
“अंकुश” (1986), “प्रतिघात” (1987) और “सलाम बॉम्बे!” (1988) के बाद “परिंदा” (1989) उनके करियर का बड़ा पड़ाव बनी, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर मिला.
“क्रांतिवीर” (1994) में प्रताप नारायण तिलक की भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर मिला, और “अग्निसाक्षी” (1996) के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार. इस तरह उनके नाम तीन राष्ट्रीय पुरस्कार रहे. “अंगार” (1992) और “अपहरण” (2005) के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर मिला.
उन्होंने “प्रहार: द फाइनल अटैक” (1991) का लेखन और निर्देशन किया और उसमें मेजर चौहान की भूमिका भी निभाई.
“तिरंगा”, “खामोशी: द म्यूजिकल”, “यशवंत”, “शक्ति: द पावर”, “अब तक छप्पन”, “राजनीति” और “काला” जैसी फिल्मों में गंभीर भूमिकाओं के साथ उन्होंने “वेलकम” (2007) और “वेलकम बैक” (2015) में उदय शेट्टी बनकर हास्य में भी खूब वाहवाही पाई. मराठी फिल्म “डॉ.
प्रकाश बाबा आमटे: द रियल हीरो” के लिए उन्हें फिल्मफेयर मराठी का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला, और “नटसम्राट” (2016) में बूढ़े रंगकर्मी की भूमिका बहुत सराही गई. बाद के वर्षों में वह “द वैक्सीन वॉर” (2023), “वनवास” (2024) और “हाउसफुल 5” (2025) में दिखे, और “गदर 2” (2023) में सूत्रधार की आवाज दी.
2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया. 8 अक्तूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में गोवा में कार्डियक अरेस्ट से उनका निधन हो गया.
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