भारतीय सिनेमा की चुनिंदा महिला निर्देशकों में से एक कल्पना लाजमी सामानांतर सिनेमा में अपनी एक विशिष्ट पहचान रखती हैं.
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वर्ष 1993 में प्रदर्शित हुई उनकी फिल्म “रुदाली” प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी की एक लघु कथा पर आधारित है. फिल्म के स्क्रीनप्ले और संवाद लिखे गुलजार ने. फिल्म का संगीत असमिया संगीत के दिग्गज भूपेन हजारिका का था और गीत लिखे गुलजार ने. इन दो महारथियों ने यादगार गीतों की रचना की.
“दिल हूम हूम करे”, “झूठी मूठी मितवा” और “समय धीरे चलो” जैसे गीत भारतीय फिल्म संगीत की अनमोल थाती हैं. फिल्म में अपनी लाजवाब अदाकारी के लिए डिम्पल कपाडिया को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार और फिल्मफेयर (क्रिटिक्स अवार्ड) प्राप्त हुआ.
इसके साथ साथ फिल्म को कला निर्देशन (समीर चंदा) और वस्त्र सज्जा (सिम्पल कपाडिया) के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ. कल्पना लाजमी का निर्देशन काबिले तारीफ है. शानदार अभिनय, हजारिका का जादुई संगीत और फिल्म के संवाद और कहानी सब मिलकर “रुदाली” को एक दर्शनीय फिल्म बनाते हैं.
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