मल्टी-ब्रांड रिटेल यानी एक ही दुकान में कई ब्रांडों का सामान बेचने वाले खुदरा कारोबार, जैसे बड़े सुपरमार्केट, में विदेशी कंपनियों के निवेश को मल्टी-ब्रांड रिटेल एफडीआई कहते हैं.
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सितंबर 2012 में केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में 51 प्रतिशत तक विदेशी निवेश की मंजूरी दी. इसके साथ कई शर्तें रखी गईं, और यह फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ा गया कि वे अपने यहां ऐसे स्टोर खुलने देना चाहती हैं या नहीं.
समर्थकों का तर्क था कि इससे किसानों को बेहतर दाम, उपभोक्ताओं को अच्छा सामान और रोजगार मिलेगा, जबकि विरोधियों को छोटे किराना दुकानदारों के कारोबार पर असर की चिंता थी. इस पर लंबी राजनीतिक बहस चली.
इसके उलट, सिंगल-ब्रांड रिटेल, यानी एक ही ब्रांड का सामान बेचने वाली दुकानों में 2018 से स्वचालित मार्ग से 100 प्रतिशत विदेशी निवेश की अनुमति है.
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