विनोद खन्ना (1946-2017) हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता और राजनेता थे, जिन्होंने खलनायक के रूप में शुरुआत करके नायक के रूप में बड़ी सफलता पाई.
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उन्होंने “मन का मीत” (1968) में खलनायक की भूमिका से शुरुआत की. गुलजार की “मेरे अपने” से उन्हें नायक के रूप में पहचान मिली. “अमर अकबर एंथनी”, “मुकद्दर का सिकंदर”, “कुर्बानी”, “दयावान” और “चांदनी” उनकी चर्चित फिल्में हैं. 1982 में वह फिल्मों से दूर होकर आचार्य रजनीश (ओशो) के आश्रम चले गए, और 1987 में “इंसाफ” से वापसी की.
वह गुरदासपुर से कई बार भाजपा के लोकसभा सांसद रहे और वाजपेयी सरकार में राज्य मंत्री भी बने. “हाथ की सफाई” के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर मिला. 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हुआ, और उसी साल उन्हें मरणोपरांत दादासाहेब फाल्के पुरस्कार दिया गया. उनके बेटे अक्षय खन्ना और राहुल खन्ना भी अभिनेता हैं.
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