सुनील दत्त (1929-2005) हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता, फिल्मकार और राजनेता थे.
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उन्होंने रेडियो सीलोन पर प्रस्तोता के रूप में शुरुआत की. “मदर इंडिया” (1957) में बिरजू की भूमिका से उन्हें बड़ी पहचान मिली. इसी फिल्म के दौरान उन्होंने आग से नर्गिस की जान बचाई, और 1958 में दोनों ने विवाह किया. “सुजाता”, “मुझे जीने दो”, “गुमराह”, “वक्त”, “हमराज”, “पड़ोसन” और “रेशमा और शेरा” उनकी प्रमुख फिल्में हैं.
“यादें” (1964) में वह अकेले कलाकार थे.
“मुझे जीने दो” और “खानदान” के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर मिला, और 1968 में पद्मश्री. वह मुंबई उत्तर-पश्चिम से पांच बार कांग्रेस के लोकसभा सांसद रहे, और 2004 में खेल और युवा मामलों के मंत्री बने. नर्गिस की याद में उन्होंने नर्गिस दत्त कैंसर फाउंडेशन बनाया. 25 मई 2005 को उनका निधन हुआ.
उनके बेटे संजय दत्त प्रसिद्ध अभिनेता हैं.
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