विमुद्रीकरण के तहत सरकार पुरानी मुद्रा को समाप्त कर देती है और नई मुद्रा चलाती है.
विस्तार
यानी पुरानी मुद्रा की वैधता नहीं रहती. वह अवैध हो जाती है. आमतौर पर अर्थव्यवस्था में काले धन पर काबू पाने के लिए यह कदम यानी विमुद्रीकरण उठाया जाता है. जब कालाधन अर्थव्यवस्था के लिये खतरा बन जाता है तो इसे दूर करने के लिये विमुद्रीकरण अपनाया जाता है. भारत में 1946, 1978 और 2016 में विमुद्रीकरण हुआ.
आठ नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के तत्कालीन नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे, जिसे आम बोलचाल में नोटबंदी कहा गया.
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